( रिपोर्ट – बबलू सेंगर)

Jalaun news today । नगर पालिका द्वारा लगाए गए स्व कर निर्धारण को असंवैधानिक बताते हुए बौद्धिक काउंसिल ग्रुप ने नगर विकास राज्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर संशोधित गृहकर निरस्त किए जाने की मांग की है।
बौद्धिक काउंसिल ग्रुप के अध्यक्ष वाचस्पित मिश्रा, सचिव केसी पाटकार के नेतृत्व में श्रवण कुमार श्रीवास्तव, योगेंद्र राठौर, ओंकार, राहुल यादव, शशिकांत वर्मा, सुशील कुमारआदि ने नगर विकास राज्यमंत्री राकेश कुमार गुरू को ज्ञापन सौंपकर बताया कि नगर की गरीब जनता पर पालिका द्वारा स्व कर निर्धारण थोपा गया है, वह काफी अधिक है। लोगों को पूर्व निर्धारित गृहकर के स्थान पर दस से बीस गुना अधिक तक कर देना पड़ रहा है। यह कर कानूनी तौर पर ही गलत है। क्योंकि 27 अक्टूबर 2017 को निकाय चुनावों की अधिसूचना जारी कर दी गई थी। आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने पर कोई नया कर लागू नहीं किया जा सकता है। ऐसे में चुनाव आचार संहिता के बीच ही नगर पालिका के तत्कालीन अधिशाषी अधिकारी महेश उपाध्याय ने दिनांक 15 नवंबर 2017 को गजट लागू कर गृहकर की वसूली प्रारंभ करा दी जो कि कानूनन गलत है। इसलिए चुनाव आचार संहिता के दौरान लागू किए गए गृहकर को निरस्त कर नए गृहकर के लिए सर्वे कराकर तर्कसंगत और न्याय संगत गृहकर लागू किया जाए। जिससे नगर की गरीब जनता से असंवैधानिक रूप से लिए जा रहे अत्यधिक गृहकर में राहत मिल सके।






