ग्राम्य विकास संस्थान परिसर में बाबा साहब भीमराव अंबेडकर को अर्पित की गई श्रदांजलि,, अपर निदेशक ने कही यह बात

Tribute paid to Baba Saheb Bhimrao Ambedkar in the premises of Rural Development Institute, Additional Director said this

Lucknow news today। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित दीन दयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान परिसर के प्रशासनिक भवन में बाबा साहब डा0 भीमराव अम्बेडकर के परिर्निर्वाण दिवस के अवसर पर, संस्थान के अपर निदेशक बी डी चौधरी की अध्यक्षता में श्रद्धांजलि सभा के साथ-साथ एक वैचारिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

उक्त वैचारिक संगोष्ठी में समस्त अधिकारियों कार्मिकों द्वारा प्रतिभाग किया गया।
उक्त श्रद्धांजलि सभा के प्रारंभिक समय में सर्वप्रथम समस्त उपस्थितजनों द्वारा दो मिनट का मौन धारण करने के उपरान्त बाबा साहब के चित्र पर सभी के द्वारा श्रद्धासुमन के माध्यम से पवित्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम का संचालन संस्थान के सहायक निदेशक डा0 एस के सिंह द्वारा उपस्थित प्रमुख प्रबुद्ध संकाय अधिकारियों को बाबा साहब के वैचारिक दर्शन, शैक्षिक जीवन तथा सामाजिक एवं राजनैतिक परिदृश्य से सम्बन्धित विचार प्रकट करने हेतु मंच पर आमंत्रित किया गया।


इस अवसर पर संस्थान के अपर निदेशक बी डी चौधरी द्वारा सभी उपस्थितजनों को सम्बोधित करते हुए बताया कि बाबा साहब जैसे युग पुरूष यदा कदा इस पृथ्वी पर जन्म लेते हैं, उनकी उपलब्धियों/परलब्धियों पर यदि चर्चा की जाये तो यह एक अनन्त विषय होगा। बाबा साहब ने भारत की आजादी की लड़ाई में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था, इस तरह दृष्टांत स्वरूप एक घटना याद आती है जब हिन्दुस्तान पाकिस्तान के बंटवारे का बीजारोपण हो रहा था। पाकिस्तान की मांग कर रहे मुस्लिम लीग के लाहौर रिजल्यूशन (1940) के बाद, डा0 अम्बेडकर ने,“थाट्स आन पाकिस्तान” नामक चार सौ पृष्ठों वाली एक पुस्तक लिखी, जिसके अन्तर्गत सभी पहलुओं पर पाकिस्तान की अवधारण का विश्लेषण किया।

उन्होनें मुस्लिम लीग के द्वारा की गई एक इस्लामिक राष्ट्र बनाने की मांग की आलोचना की और साथ में यह तर्क भी दिया कि यदि इस्लामिक राष्ट्र बनाना ही आवश्यक है तो बंगाल और पंजाब की सीमाओं को फिर से तैयार किया जाना चाहिए तथा दोनों सम्प्रदायों का पूर्णरूपेण विभाजन भी होना चाहिए जिससे भविष्य में किसी प्रकार का किसी भी क्षेत्र में साम्प्रदायिक तनाव उत्पन्न न हो। ठीक इसी प्रकार समान नागरिक संहिता के पक्ष में भी साकारात्मक विचार प्रकट किए थे। सम्पूर्ण रूप से समान नागरिक संहिता के पक्षधर थे और कश्मीर के सन्दर्भ मे अपने अवशेष राजनीतिक जीवनकाल में सदैव 370 धारा का विरोध करते रहे। समसामयिक दृष्टिाकोण से यदि आंकलन किया जाये तो बाबा साहब का दर्शन भारत को एक आधुनिक, वैज्ञानिक सोंच, तर्कसंगत विचारो व पर्सनल कानून रहित राष्ट्र बनाने का अप्रतिम, अद्वितीय एवं अक्षुण्ण सपना हुआ करता था।


श्रद्धांजलि सभा की वैचारिक गोष्ठी के दौरान बाबा साहब के व्यक्तित्व, कृतित्व, राजनीतिक/सामाजिक जीवन जीने की शैली तथा राष्ट्र प्रेम इत्यादि विषयों पर संस्थान के उप निदेशक डा0 नीरजा गुप्ता, सुबोध चन्द्र दीक्षित, सहायक निदेशक डा0 योगेन्द्र कुमार, डा0 संजय कुमार, डा0 अशोक कुमार, डा0 एस0के0 गुप्ता तथा संकाय सदस्य डा0 अलका शर्मा द्वारा महत्तवपूर्ण एवं उपयोगी विचार प्रकट किये गये।

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