मुस्कुराहटों के शहर में आत्महत्याओं की बाढ़,,मनोचिकित्सक ने बताई यह बजह

मनोज श्रीवास्तव/BNE

लखनऊ।जिस शहर के पहचान की टैग लाइन मुस्कुराहट से होती है, उस शहर में एकाएक बड़ी संख्या में लोगों द्वारा आत्महत्या करना बड़ा भयावह हाल बयां कर रहा है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को लेकर कहा जाता है कि “मुस्कुराइये की आप लखनऊ में हैं”।लेकिन थोड़े ही दिनों में आधा दर्जन से अधिक लोगों ने विभिन्न कारणों से मौत को गले लगा लिया।
बृहस्पतिवार रात सरोजनी नगर के दरोगा खेड़ा निवासी वेल्डिंग कारीगर विकास गौतम (21) ने फंदा लगा लिया। इसके अलावा गोसाईगंज, चिनहट, गोमती नगर और तालकटोरा में भी छह लोगों ने खुदकुशी कर ली।
सरोजनी नगर स्थित दरोगा खेड़ा निवासी सूरज ने बताया कि बृहस्पतिवार की रात भाई विकास शराब के नशे में घर आया और सो गया। अगले दिन सुबह वह अपने कमरे में धोती से कुंडे के सहारे लटकता मिला। सूरज ने बताया कि विकास का एक युवती से प्रेम-प्रसंग चल रहा था। युवती के भाई ने विकास को बहन से दूर रहने की हिदायत दी थी। इस कारण वह लगातार डिप्रेशन में चल रह रहा था। दूसरा मामला गोमती नगर के विराम खंड का है। यहां के निवासी बृजमोहन ने बताया कि बेटा रोहित चौधरी (34) कुछ दिनों से बेरोजगारी के चलते डिप्रेशन में चल रहा था। सोमवार सुबह देर तक बेटे के ना जगने पर घरवाले उसे जगाने गए तो रोहित चादर से पंखे के सहारे लटकता मिला। तीसरी घटना तालकटोरा स्थित सोनापुरम का है। यहां की रहने वाली नैंसी वर्मा (24) ने शुक्रवार की दोपहर घर में फंदा लगाकर जान दे दी।
चौथा मामला गोसाईंगंज के जलालाबाद गांव का है। गांव निवासी पारस रावत (25) ने शुक्रवार की रात गांव के बाहर पेड़ की डाल से गमछे के सहारे फंदा लगा लिया। इंस्पेक्टर ब्रिजेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि पारस रावत शुक्रवार देर रात घर से निकले थे। सुबह करीब 6.00 बजे ग्रामीणों को पारस का शव पेड़ से लटका मिला। फिलहाल आत्महत्या का कारण पता नहीं चल सका है। घरवालों ने कोई तहरीर नहीं दी है। भाई अभिषेक ने बताया कि पासर लिफ्ट लगाने का काम करता था।पांचवा मामला सरोजनी नगर थाना इलाके के दरोगा खेड़ा का है। मूलरूप से उन्नाव निवासी अंकिता (24) परिवार के साथ दरोगा खेड़ा में रहती थी। इंस्पेक्टर राजदेव प्रजापति ने बताया कि अंकिता का पड़ोसी युवक से प्रेम-प्रसंग चल रहा था। बृहस्पतिवार को दोनों में किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। विवाद से आहत अंकिता ने प्रेमी के कमरे में ही दुपट्टे से पंखे के हुक के सहारे फंदा लगा लिया। तहरीर मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
छठा मामला भी सरोजनी नगर के दरोगा खेड़ा का ही है। यहां के निवासी हरिश्चंद्र (65) ने घर में बृहस्पतिवार की रात लुंगी से पंखे के हुक के सहारे आत्महत्या कर ली। इंस्पेक्टर ने बताया कि हरिश्चंद्र के खुदकुशी करने का कारण पता नहीं चल सका है। सातवां मामला चिनहट के इमलिया गांव का है। गांव निवासी कुसुम यादव (30) ने बीमारी से परेशान होकर शनिवार की दोपहर 12:30 बजे दुपट्टे से पंखे के सहारे फंदा लगा लिया। इंस्पेक्टर दिनेश चंद्र ने बताया कि घरवालों ने किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया है।”

एकांकी जीवन पध्दति से व्यक्ति जटिलताओं से घिरता जाता है, समस्या अपनों से बांटे-डॉ देवाशीष

इस संदर्भ में बलरामपुर अस्पताल के अधीक्षक मनोचिकित्सक डॉ देवाशीष शुक्ल ने कहा कि परिवार जब एक होते थे तब ऐसी घटनाएं बहुत कम होती थी। बच्चे हों या बड़े हर कोई एकांकी निजी जीवन जीने पर जोर दे रहा है। पहले संयुक्त परिवार रहने पर लोग एक-दूसरे का हाल-चाल करते थे। परिवार में इसकी कमी हुई है। लोग दूसरे का हाल लेने की जगह स्वयं में व्यस्त दिखने में जोर दे रहे हैं। यह आपके जीवन पध्दति को समाज से काट दे रहा है। जब एक-दूसरे आपस मे सुख-दुख की बात करते हैं तो आपसी चर्चा में संयुक्त समाधान निकलता है। एकांकी व्यक्ति जब नकारात्मक चिंतन में डूबता है तो खुद की कल्पना में ऐसा डूबता है कि मानों समाधान के सब दरवाजे बंद हो गये। यही कब एक व्यक्ति दूसरे से चर्चा करता है तो दो लोग नकारात्मकता से उबरने में सफलता प्राप्त करने में अधिक सफल हुये हैं। इस लिये अपने जीवन को जटिलता से निकाल कर अपनी समस्याओं को एक दूसरे में बांटे।

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