रिपोर्ट बबलू सेंगर

Jalaun news today । जालौन नगर के लक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय शिव महापुराण कथा में भगवान शिव की लीलाओं का वर्णन साध्वी समाहिता दीदी ने किया। इस दौरान मंदिर परिजन बम बम भोले के जयकारों से गूंजता रहा।
आयोजन के चौथे दिन कथा वाचक साध्वी समाहिता दीदी ने समुद्र मंथन के प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि जब विष उत्पन्न हुआ और उससे समस्त सृष्टि पर संकट आया, तब भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए उस विष का पान किया। इसी कारण उन्हें नीलकंठ कहा जाता है। साध्वी ने कहा कि यह प्रसंग त्याग, बलिदान और परोपकार की सर्वाेच्च मिसाल है। इससे ज्ञात होता है कि दूसरों के कल्याण के लिए कष्ट भी सहना पड़े तो संकोच नहीं करना चाहिए। भगवान शिव सदा ही अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और सच्चे मन से की गई भक्ति को स्वीकार करते हैं। उन्होंने शिव नाम स्मरण, रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र के जाप के बारे में भी बताया। उन्होंने बताया कि शिव की भक्ति से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मन को शांति प्राप्त होती है। कथा के दौरान श्रृद्धालु बम बम भोले के जयकारे लगाते रहे। जिससे माहौल भक्तिमय हो गया। इस मौके पर नविता, अर्चना, मिथलेश, रानी, प्रेरणा, भावना, रामकेश, श्यामजी गुप्ता, पुष्पेंद्र, अनुराग, मधु, विनीता आदि रहे।





