रिपोर्ट बबलू सेंगर

Jalaun news today । जालौन में बौद्धिक काउंसिल ग्रुप के सदस्यों ने नगर में आए अंतर्राष्ट्रीय सहकारी संघ के अध्यक्ष डॉ. चंद्रपाल यादव को ज्ञापन सौंपकर जालौन राज्य की अंतिम शासिका एवं महान क्रांतिकारी वीरांगना महारानी ताईबाई को उचित सम्मान दिलाए जाने की मांग की।
बौद्धिक काउंसिल ग्रुप के अध्यक्ष वाचस्पति मिश्रा व सचिव केसी पाटकार ने अंतर्राष्ट्रीय सहकारी संघ के अध्यक्ष डॉ. चंद्रपाल यादव को ज्ञापन सौंपकर बताया कि सन् 1840 में महाराजा बालाराव की मृत्यु के बाद अंग्रेजों ने जालीन राज्य को ईस्ट इंडिया कंपनी के राज्य में मिलाने की घोषणा कर दी थी। लेकिन महारानी ताईबाई और जालौन राज्य की जनता ने इस विलय को स्वीकार नहीं किया। बिठूर के पेशवा नाना धुंधपंत ने तात्या टोपे को भेजकर पेशवाई के अधिकार से नाना गोविंद राव की नातिन के पांच वर्षीय बेटे गोविंदराव को जालौन राज्य का राजा घोषित कर दिया और महारानी ताईबाई को उनका संरक्षक बनाकर शासन चलाने की जिम्मेदारी सौंप दी। महारानी ताईबाई ने जालौन में स्वतंत्र क्रांतिकारी सरकार की घोषणा कर दी। महारानी ताईबाई ने नाना साहब के भतीजे राव साहब पेशवा को कालपी बुलाकर स्वतंत्र पेशवाई राज्य की स्थापना कर तात्या टोपे को पेशवाई राज्य का सेनापति बनाया एवं अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल फूंक दिया। सन् 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में नानाराव पेशवा के निर्देश पर महारानी ताईबाई ने युद्ध का बिगुल फूंक दिया। महारानी ताईबाई और महारानी लक्ष्मी बाई समकालीन थीं और 1857 की क्रांति में मिलकर अंग्रेज हुकुमत का विरोध किया था। लेकिन दुर्भाग्य से अंग्रेज हुकूमत से भीषण युद्ध के उपरान्त पराजय हाथ लगी। अंग्रेजों से पराजित होने पर अंग्रेजों ने उन्हें बिहार की मुंगेर जेल में जीवन पर्यंत कैद में डाल दिया। जालौन राज्य के सात मंजिला भव्य किले को तोपों से बिस्मार कर दिया गया। महारानी ताईबाई प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में जिले की प्रथम महिला स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थी जिस पर जालौन को हमेशा गर्व रहेगा। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि ताईबाई के ऐतिहासिक योगदान को देखते हुए उन्हें उचित सम्मान दिया जाना आवश्यक है। यही उनके प्रति सच्ची श्रृद्धांजलि होगी।





