रिपोर्ट बबलू सेंगर

Jalaun news today । गुटका पर टैक्स बढ़ाए जाने के बाद नगर व ग्रामीण क्षेत्र में गुटके के दामों में तेज़ी से बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। अलग-अलग कंपनियों के गुटके अब पहले की तुलना में अधिक कीमत पर बिक रहे हैं। हालांकि, वर्तमान में बाजार में जो गुटका उपलब्ध है, उसका अधिकांश स्टॉक पुराने एमआरपी वाला ही बताया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद उपभोक्ताओं से बढ़ी हुई कीमत वसूली जा रही है।
टैक्स बढ़ने की जानकारी मिलते ही कुछ व्यापारियों और थोक विक्रेताओं ने पहले से मौजूद गुटके का भंडारण कर लिया था। अब वही पुराना स्टॉक नए बढ़े हुए दामों पर बेचा जा रहा है। इससे व्यापारियों को अतिरिक्त मुनाफा हो रहा है, जबकि आम उपभोक्ता को नुकसान उठाना पड़ रहा है। गुटका खाने के आदी लोग मजबूरी में महंगे दामों पर इसे खरीद रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर नगर तक मे गुटके की कीमतों में असमानता देखने को मिल रही है। कहीं एक पाउच के 2 से 3 रुपये अधिक वसूले जा रहे हैं तो कहीं पूरे पैकेट पर मनमाना दाम वसूला जा रहा है। कई दुकानों पर एमआरपी से अधिक मूल्य लिखे बिना ही बिक्री की जा रही है, जिससे उपभोक्ताओं को शिकायत का अवसर भी नहीं मिल पा रहा है।स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को इस मामले में सख्ती बरतनी चाहिए। यदि टैक्स बढ़ा है तो नए स्टॉक पर लागू होना चाहिए, न कि पुराने एमआरपी वाले माल पर। उपभोक्ताओं ने मांग की है कि बाजार में बिक रहे गुटके की जांच की जाए और एमआरपी से अधिक मूल्य वसूलने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो। वहीं, कुछ दुकानदारों का कहना है कि नई खेप महंगे दामों पर मिल रही है, इसलिए उन्हें भी बिक्री मूल्य बढ़ाना पड़ रहा है।






