जालौन जिले में आंगनबाड़ी के बच्चों को मिलेगा नया स्वाद, होगा बेहतर पोषणःयादव

ब्यूरो रिपोर्ट

Orai / Jalaun news today । जालौन जनपद के 1815 आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत बच्चों के साथ गर्भवती, धात्री महिलाओं को अब नई टीएचआर रेसिपी मिलेगा जिसमें नया स्वाद और बेहतर पोषण मिलेगा। उक्त बात जिला कार्यक्रम अधिकारी राकेश यादव ने एक भेंटवार्ता के दौरान बतायी।
उन्होंने बताया कि बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा पूर्व के समय में आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों के साथ ही गर्भवती, धात्री महिलाओं के पोषण हेतु जो खाद्यान्न बांटा जा रहा था उसे अब बदल दिया गया है। डीपीओ ने बताया कि पूर्व के समय में लाभार्थियों की 4 श्रेणी थी लेकिन अब उन्हें 7 श्रेणियों में बांट दिया गया है। जिसमें श्रेणीवार कैलोरी, बेहतर प्रोटीन, उपयुक्त मात्रा में नमक व चीनी के साथ ही सात प्रमुख सूक्ष्म पोषक तत्वों से सशक्त या फोर्टिफाई किया गया है। नये टीएचआर में आयरन, कैल्शियम, जिंक, विटामिन ए, फोलेट, विटामिन बी 6 एवं बिटामिन बी 12 शामिल किया गया है। उन्होंने गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को आटा, बेसन, सोया, बर्फी मीठा, दलिया, मूंग दाल खिचड़ी नमकीन के रूप में संपूर्ण मातृ आहार वितरित किया जायेगा। इसी प्रकार से सामान्य श्रेणी के 6 माह से 1 वर्ष तक के बच्चों को आटा बेसन हलवा मीठा, 1 से 3 वर्ष तक के बच्चों को आटा बेसन हलवा मीठा तथा 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को दलिया मूंग, सोया खिचड़ी नमकीन आंगनबाड़ी केंद्रों से बांटी जा रही है। डीपीओ श्री यादव ने बताया कि कुपोषित अल्पोषित बच्चे 6 माह से 1 वर्ष तक के लिये ऊर्जायुक्त हलवा मीठा, 1 वर्ष से 3 वर्ष तक के बच्चों को ऊर्जायुक्त हलवा मीठा व 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को ऊर्जायुत हलवा मीठा व ऊर्जायुक्त दलिया नमकीन जो सक्षम पोषण होता है उसे वितरित किया जा रहा है।

पीएम मातृ वंदना योजना में पंजीकरण उठायें लाभ

जिला कार्यक्रम अधिकारी राकेश यादव ने बताया कि बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा गर्भवती महिलाओं को लाभ पहुंचाये जाने के लिये प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना संचालित की जा रही है। जिसमें गर्भवती महिलाओं को पोषक आहार के लिये पहले बच्चे के जन्म पर पांच हजार रुपये दो किस्तों में दिये जाते हैं। जबकि दूसरी बच्ची के जन्म पर 6 हजार रुपये दिये जाते हैं। इसका लाभ लेने के लिये पात्र महिलाओं को बाल विकास परियोजना अधिकारी या मुख्य सेविका परियोजना से संपर्क कर महिला को अपना पंजीकरण कराना होता है।