सारस्वत साधना का एक सोपान’ का लोकार्पण, प्रो. ओम् प्रकाश पाण्डेय के कृतित्व को विद्वानों ने सराहा

Lucknow news today। ज्ञान, शिक्षा, साहित्य और समाज के प्रति दीर्घकालीन योगदान एवं समर्पित सारस्वत साधना के लिए प्रो. ओम् प्रकाश पाण्डेय के सम्मान में प्रकाशित अभिनन्दन ग्रन्थ ‘सारस्वत साधना का एक सोपान’ का शनिवार को निराला सभागार, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ में भव्य समारोह के बीच लोकार्पण हुआ। देश के विभिन्न हिस्सों से जुटे संस्कृत एवं साहित्य जगत के विद्वानों, शिक्षकों, साहित्यकारों, विद्यार्थियों, परिजनों और शुभचिंतकों ने प्रो. पाण्डेय के व्यक्तित्व और कृतित्व को नमन करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं।

समारोह का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ। आचार्यों और विद्यार्थियों ने वैदिक एवं लौकिक मंगलाचरण प्रस्तुत कर वातावरण को आध्यात्मिक एवं साहित्यिक गरिमा प्रदान की। अतिथियों का स्वागत प्रो. रेखा शुक्ला ने किया।

अभिनन्दन ग्रन्थ का लोकार्पण इंटरनेशनल गीता फाउंडेशन, मिशिगन (अमेरिका) के संस्थापक योगी आनन्द सहित देश के अन्य मूर्धन्य विद्वानों ने किया।

समारोह की अध्यक्षता पूर्व राज्यसभा सदस्य डॉ. अशोक बाजपेयी ने की। उन्होंने कहा कि ‘सारस्वत साधना का एक सोपान’ केवल प्रो. पाण्डेय के कृतित्व का प्रामाणिक दस्तावेज नहीं, बल्कि उनकी आजीवन समर्पित साधना का प्रतीक भी है।

मुख्य अतिथि जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय, चित्रकूट के कुलपति प्रो. शिशिर पाण्डेय ने प्रो. ओम् प्रकाश पाण्डेय के व्यक्तित्व को प्रज्ञा और शील का मणिकांचन समन्वय बताया। उन्होंने कहा कि कवि के रूप में उनकी मेधा जहां प्रभावित करती है, वहीं उनका संवेदनशील कवि हृदय उनकी रचनात्मक प्रतिभा को विशिष्ट बनाता है।

सारस्वत अतिथि एवं गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार के पूर्व कुलपति प्रो. रूप किशोर शास्त्री ने अपने प्रशस्ति संदेश में प्रो. पाण्डेय को सारस्वत साधना का महान साधक बताया। उन्होंने कहा कि पाण्डेय जी गवेषक विद्वानों और सुधी अध्येताओं के विद्यामार्ग को प्रकाशित करने वाले विद्वान हैं।

विशिष्ट अतिथि महामहोपाध्याय डॉ. अमलधारी सिंह, पूर्व ओएसडी, वेदविद्या प्रतिष्ठान, उज्जैन ने प्रो. पाण्डेय की प्रशासनिक दक्षताओं तथा उनकी साहित्यिक एवं विद्वत कृतियों पर प्रकाश डाला। देश के विभिन्न राज्यों से आए संस्कृत जगत के विद्वानों ने भी उनके महनीय कार्यों और योगदान को रेखांकित किया।

समारोह में प्रो. सत्यकेतु और डॉ. अनूप मिश्र ने प्रो. ओम् प्रकाश पाण्डेय के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। ग्रन्थ के सम्पादन के दौरान के अपने अनुभव पूर्व प्राचार्या प्रो. रेखा शुक्ला ने साझा किए। उन्होंने कहा कि इस ग्रन्थ के निर्माण की पूरी प्रक्रिया स्वयं में एक सारस्वत यात्रा रही।

कार्यक्रम के आयोजन में डॉ. विपिन पाण्डेय सहित प्रो. पाण्डेय के शिष्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अभिनन्दन समारोह को सफल बनाने में उनके इष्ट-मित्रों और परिवारीजनों का सहयोग भी उल्लेखनीय रहा। संस्कृत विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो. अभिमन्यु ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

समारोह में विभिन्न प्रदेशों से आए विद्वानों, शिक्षकों, साहित्यकारों, विद्यार्थियों, परिजनों एवं शुभचिंतकों ने प्रो. ओम् प्रकाश पाण्डेय को सम्मान एवं शुभकामनाएं प्रेषित कीं। ‘सारस्वत साधना का एक सोपान’ का लोकार्पण इस अर्थ में भी महत्वपूर्ण रहा कि यह ग्रन्थ एक विद्वान के जीवन, साधना, साहित्य और समाज के प्रति उनके योगदान को समकालीन पीढ़ी के सामने दस्तावेजी रूप में प्रस्तुत करता है।