रिपोर्ट बबलू सेंगर

Jalaun news today। जालौननगर के श्रीवीर बालाजी हनुमान मंदिर में पिछले सात दिनों से चल रही श्रीमद्भागवत कथा का रविवार को समापन किया गया। कथा के अंतिम दिन व्यास ने कथा का सारांश कह जीवन को जीने की कला भी समझाई।
उरई मार्ग स्थित श्रीवीर बालाजी हनुमान मंदिर में 25 नवंबर से द्वितीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ किया गया था। श्रीधाम से पधारे पंडित संदीप नरायण मिश्रा ने कथा सुनाकर भक्तों को भाव विभोर किया। कथा के अंतिम दिन रविवार को भगवताचार्य ने सातों दिन की कथा का सारांश किया। उन्होंने बताया कि मनुष्य का जीवन कई योनियों के बाद मिलता है। इसे कैसे जीना चाहिए, यह भी समझाया। कथा वाचक ने सूर्यदेव से सत्रजीत को उपहार स्वरूप मिली मणि का प्रसंग सुनाते हुए मणि के खो जाने पर जामवंत और श्रीकृष्ण के बीच 28 दिन तक चले युद्ध और फिर जामवंती, सत्यभामा समेत से श्रीकृष्ण सभी आठ विवाह की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि कैसे प्रभु ने दुष्ट भौमासुर के पास बंदी बनी हुई 16 हजार 100 कन्याओं को मुक्त करवाया और उन्हें अपनी पटरानी बनाकर उन्हें मुक्ति दी। उन्होंने सुदामा चरित्र को विस्तार से सुनाया। कृष्ण और सुदामा की निश्छल मित्रता का वर्णन करते हुए बताया कि कैसे बिना याचना के कृष्ण ने गरीब सुदामा का उद्धार किया। मित्रता निभाते हुए सुदामा की स्थिति को सुधारा। गोवध का विरोध और गोसेवा करने पर भी जोर दिया। मंदिर परिसर में चल रहे 35 दिवसीय धार्मिक आयोजन की कड़ी में रविवार को द्वितीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन हो गया। सोमवार से श्रीराम कथा के साप्ताहिक कार्यक्रम का शुभारंभ होगा। इस मौके पर मंदिर के पुजारी कमलेश महाराज, अनुरूद्ध विश्नोई, राजीव विश्नोई, जय पचौरी, जय पचौरी, देवेंद्र प्रजापति, आशीष पटेल, अंशुल पटेल, रामू, सुमित आदि भक्त मौजूद रहे।





