(रिपोर्ट – बबलू सेंगर)

Jalaun news today । हम बाजार से विदेशी खिलौने और बोतल खरीदकर दूसरे देशों को मालामाल कर रहे हैं, हमें इसे रोकना होगा। हम अपने आसपास की कला को जीवंत कर स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित कर देश को मज़बूत कर सयकते हैं। यह बात कंपोजिट विद्यालय छिरिया सलेमपुर में हस्तशिल्प वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार द्वारा शिल्प प्रदर्शन एवं जागरूकता कार्यक्रम में अरविंद पहारिया ने कही।
कंपोजिट विद्यालय छिरिया सलेमपुर में हस्तशिल्प वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार द्वारा शिल्प प्रदर्शन एवं जागरूकता कार्यक्रम में स्टेट अवार्ड प्राप्त शिल्पकार वीरेंद्र कुमार, शिल्पकार रामसिंह, शिल्पकार अरविन्द पहरिया, शिल्पकार आरती देवी एवं शिल्पकार कर्तव्य सिंह ने हस्तशिल्प एवं चित्रकला की जानकारी दीं। शिल्पी व वीरेंद्र ने बच्चों को गौरा पत्थर शिल्पकला के बारे मे जानकारी दी और बच्चों को मूर्तिया बनाकर दिखाई। बच्चों से भी पत्थर पर डिजायन बनवाई। वीरेंद्र ने कहा कि हमें अपनी कला को जीवंत रखना हैं। इसके लिए आप ही धरोहर हैं। कर्तव्य सिंह ने बच्चों को मिट्टी के कुल्हड़, दिया आदि बनाना सिखाए। कर्तव्य सिंह ने बच्चों से कहा की कई घरों में मिट्टी का काम होता होगा, इस काम को सीखकर रोजगार अपनाया जा सकता है। हस्तशिल्पी आरती देवी ने मिट्टी की मूर्ति और खिलौने आदि बनाकर दिखाए और कहा कि हमें अपनी लोककलाओं को संरक्षित करने की जरुरत है तभी ?आत्म निर्भर भारत का सपना साकार हो सकेगा। अरविन्द पहारिया ने कहा कि हम बाजार से विदेशी खिलौने आदि खरीदकर दूसरे देशो को तो मालामाल कर रहे हैं। जबकि हमारी लोक संस्कृति का अभिन्न अंग लोक कलाएं विलुप्त होती जा रही हैं। हमें इसे रोकना होगा हम अपने आस पास की कला को जीवंत कर स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित कर देश को मज़बूत बनाना होगा। जानकारी के अभाव मे हमारे बीच के शिल्पी आज हासिए पर हैं उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की आवश्यकता है उन्होंने अपील करते हुए कहा कि शिल्पकला को बढ़ावा देकर स्थानीय रोजगार पैदा करें। इस मौके पर प्रधानाचार्या सरोज गुप्ता, धीरेन्द्र कुशवाहा, शिवकुमार राठौर आदि मौजूद रहे।





