(रिपोर्ट – बबलू सेंगर)

Jalaun news today । नगर तथा ग्रामीण क्षेत्रों में शारदीय नवरात्र के शुभ अवसर पर माता के सातवां रूप कालरात्रि की भक्तों ने भाव भक्ति से पूजा अर्चना कर मन्नत मांगी। इस मौके पर माता मंदिरो में देवी भक्तों का सैलाब उमड़ा रहा।
नवरात्र के सातवें दिन मां शांति कालरात्रि की पूजा अर्चना की गई। पंडित अरविंद बाजपेई ने बताया कि इस दिन साधक का मन सहस्रार चक्र में स्थित रहता है। इससे ब्रह्मंड की समस्त सिद्धियों का द्वार खुलने लगता है। सहस्रार चक्र स्थित साधक का मन पूर्णतः मां कालरात्रि के स्वरूप में अवस्थित रहता है। वह उनके साक्षात्कार से मिलने वाले पुण्य का वह भागी हो जाता है उसके समस्त पापों का नाश हो जाता है एवं पुण्य की प्राप्ति होती है। कहा कि मां कालरात्रि काल का नाश करने वाली हैं, इसी वजह से इन्हें कालरात्रि कहा जाता है। मां दुर्गा के कालरात्रि रूप का अवतार असुरों के राजा रक्तबीज का वध करने के लिए हुआ था। इनकी पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। मां कालरात्रि का यह स्वरूप अत्यंत भयानक है, मगर वह सदैव अपने भक्तों को शुभ फल प्रदान करती हैं। मां कालरात्रि की पूजा करने से हमारे मन का हर प्रकार का भय नष्ट होता है। नगर में 35 स्थानों पर स्थापित देवी प्रतिमाओं के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में उदोतपुरा, पहाड़पुरा, महिया, प्रतापपुरा, खनुआं, कुंवरपुरा, सिहारी पड़ैया, कैंथ आदि गांवों में देवी मंदिरों एवं देवी पांडालों में देवी भक्त भारी संख्या में पहुंच रहे हैं।





