रिपोर्ट बबलू सेंगर
Jalaun news today ।जालौन नगर और आसपास के क्षेत्रों में एक बार फिर मिट्टी खनन का कारोबार तेज होने की चर्चाएं हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रात होते ही मिट्टी से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही शुरू हो जाती है, जो पूरी रात जारी रहती है। सबसे अधिक गतिविधियां चुंगी नंबर चार से बाबई रोड मार्ग पर देखी जा रही हैं, जहां रातभर ट्रैक्टरों का आवागमन बना रहता है। सवाल यह है कि जब यह सब खुलेआम हो रहा है तो जिम्मेदार विभागों की नजर आखिर क्यों नहीं पड़ रही?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि रातभर भारी वाहनों की आवाजाही से सड़कें तेजी से क्षतिग्रस्त हो रही हैं। धूल के गुबार से राहगीरों और आसपास रहने वाले लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है, जबकि पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आ रही। लोगों का आरोप है कि शिकायतें किए जाने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।
सबसे बड़ा सवाल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर खड़ा हो रहा है। जब प्रदेश सरकार अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए लगातार अभियान चलाने और सख्त कार्रवाई के निर्देश देने का दावा करती है, तब जालौन में रातभर चल रही कथित खनन गतिविधियां किसके संरक्षण में संचालित हो रही हैं? यदि खनन पूरी तरह वैध है तो इसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही, और यदि अवैध है तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
लोगों का कहना है कि यदि बिना अनुमति या नियमों के विपरीत मिट्टी का खनन और परिवहन किया जा रहा है तो यह केवल सरकारी राजस्व की हानि का मामला नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न है। आखिर जिम्मेदार अधिकारी मौके पर कार्रवाई करने के बजाय मौन क्यों हैं?
नगरवासियों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, रात में हो रही ट्रैक्टरों की आवाजाही की निगरानी की जाए और यदि कहीं भी अवैध मिट्टी खनन की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के साथ-साथ लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाए। जब तक दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक अवैध खनन पर अंकुश लगना मुश्किल माना जा रहा है।





