मंहगाई की मार : 15 दिनों में बढ़े सब्जियों के दाम,,गड़बड़ा गया किचन का बजट

रिपोर्ट बबलू सेंगर

Jalaun news today । शहर की सब्जी मंडियों में इन दिनों महंगाई का असर साफ दिखाई दे रहा है। बीते करीब पंद्रह दिनों के भीतर हरी सब्जियों के दामों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे आम आदमी की रसोई का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है। हालत यह है कि रोजाना इस्तेमाल होने वाली सब्जियां भी अब आम उपभोक्ता की पहुंच से धीरे-धीरे दूर होती जा रही हैं।
सब्जी मंडी में आलू, प्याज और टमाटर जैसी आवश्यक सब्जियों के दामों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जो सब्जियां दो सप्ताह पहले 10 से 30 रुपये प्रति किलो बिक रही थीं, वे अब 20 से 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं। टमाटर के दामों में 20 से 30 रुपये तक की बढ़ोतरी देखी गई है। शिमला मिर्च, गोभी और मटर जैसी सब्जियां भी पहले की तुलना में महंगी हो चुकी हैं। करेला, लौकी, भिंडी और बैंगन जैसी हरी सब्जियों के दामों में भी 15 से 25 रुपये प्रति किलो तक इजाफा हुआ है। सब्जी खरीदने आई मिथलेश उदैनियां, फरजाना अख्तर, नीलम श्रीवास्तव आदि ने बताया कि पहले वे सप्ताह भर की सब्जियां एक साथ ले जाती थीं, लेकिन अब रोजाना जरूरत भर ही खरीद रही हैं। कई परिवारों ने बताया कि उन्हें सब्जियों की मात्रा कम करनी पड़ रही है या फिर सस्ती सब्जियों तक ही सीमित रहना पड़ रहा है। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि बच्चों की पसंद की सब्जियां अब बजट से बाहर हो रही हैं। महंगाई का सबसे अधिक असर मध्यमवर्ग और दैनिक मजदूरी करने वाले परिवारों पर पड़ रहा है। उनका कहना है कि पहले ही रसोई गैस, दाल, तेल और अन्य राशन सामग्री के दाम बढ़े हुए हैं, ऐसे में सब्जियों की कीमतों में अचानक उछाल ने घर का हिसाब बिगाड़ दिया है। कई लोग अब वैकल्पिक रूप से दाल या आलू पर अधिक निर्भर होने लगे हैं। स्वास्थ्य के नजरिए से भी यह स्थिति चिंताजनक मानी जा रही है। डॉ. आरके राजपूत का कहना है कि हरी सब्जियां शरीर को आवश्यक विटामिन, फाइबर और पोषक तत्व प्रदान करती हैं। यदि लोग महंगाई के कारण पर्याप्त मात्रा में सब्जियां नहीं खरीद पाएंगे तो इसका असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ सकता है, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों पर।