रंग लाई डीजी कारागार की कुशल रणनीति,, एनसीआरबी के आंकड़ों में चुस्त दुरुस्त है यूपी की जेलों की सुरक्षा व्यवस्था,,,

बंदियों के सुधार एवं पुनर्वास समेत अन्य मामलों में अब्बल हैं यूपी की जेलें

(ब्यूरो रिपोर्ट)
उत्तर प्रदेश के डीजी कारागार का पदभार ग्रहण करने के बाद से ही महानिदेशक जेल आनंद कुमार ने सूबे की जेलों की दशा और दिशा सुधारने के लिए रणनीति बनाने का काम शुरू किया। यह उनकी कुशल रणनीति का ही परिणाम है कि आज आये देश के एनसीआरबी के आंकड़ों ने भी यूपी के कारागार की व्यवस्थाओं की सराहना की है। उल्लेखनीय है कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो ने शुक्रवार को प्रिजन स्टैटिसटिक्स इंडिया 2021 का आंकड़ा जारी कर दिया है । आज आये इन आंकड़ों में यूपी की जेलों की व्यवस्था बहुत ही चुस्त-दुरुस्त पाई गई । यह यूपी के डीजी कारागार आनंद कुमार की कुशल रणनीति का ही परिणाम है कि देश मे सबसे अधिक बंदियों की संख्या वाली सूबे की जेलों की सराहना एनसीआरबी में की गई है।और कम जेलें और अधिक बंदी होने के बाद भी यहां की जेलों की व्यवस्था बहुत ही दुरुस्त पाई गई है । एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार देश की अन्य जेलों की तुलना में यूपी की जेलों में बंदियों की शिक्षा जैसे कंप्यूटर प्रशिक्षण उच्च शिक्षा प्रौढ़ शिक्षा महिला महिला बंदियों के उत्थान और विकास बंदियों के कौशल विकास बंदियों के द्वारा उत्पादित वस्तुओं जैसे मामलों में उत्तर प्रदेश ने देश के अन्य जिलों की तुलना में बेहतरीन एवं उत्साहजनक परिणाम दिए हैं

ऐसे होता है आंकलन

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जेलों के प्रबंधन अनुशासन और बंदियों के मानव अधिकार को दृष्टिगत रखते हुए ही किसी प्रदेश की जेलों की व्यवस्था का आकलन किया जाता है। और इन सभी तथ्यों के अंतर्गत उत्तर प्रदेश की जेलों में सुधार और प्रगति को एनसीआरबी के ताजा आंकड़ों ने बहुत ही सराहनीय रूप से रेखांकित किया है—

यूपी की जेलों में निरुद्ध हैं सबसे अधिक बंदी

यूपी की जेलें ऐसी हैं जहाँ पर जेलें कम है और इन जेलों में बंद बंदियों की संख्या बहुत ही ज्यादा है । एनसीआरबी द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में वर्तमान में कुल 75 जिले हैं जिनमें कुल 117789 बंदी निरुद्ध है और यह संख्या देश में सर्वोच्च है। देश के सभी राज्यों की जेलों में कुल मिलाकर 5 लाख 54 हजार 034 बंदी निरुद्ध है जिसका लगभग 21.3% अकेले यूपी की जेलों में बंद है उतनी ही अधिक संख्या में बंदियों को अनुशासित रखते हुए और उनके सुधार और पुनर्वास के कार्यों में उत्तर प्रदेश में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं।

यह कारागार प्रशासन की कुशल रणनीति का ही परिणाम है कि
बंदियों के कौशल विकास के मामलों में यूपी के जेलें देश में प्रथम स्थान पर रही।

यह जेल प्रशासन का ही असर है कि यहां के बंदी कौशल विकास के मामलों में काफी अव्वल प्रशिक्षण और शिक्षण ले रहे हैं बंदियों को शिक्षण प्रशिक्षण और कौशल विकास के कार्यों में सिद्धहस्त करने का सुखद परिणाम निकला है एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार कौशल विकास के कार्यों जैसे कृषि कारपेंटरी सिलाई बुनाई साबुन और फिनायल निर्माण हैंडलूम आदि में वर्ष 2021 में यूपी की जेलों में निरुद्ध 18.3% बंदियों को दक्ष किया गया है यह देश में प्रथम स्थान है । जबकि राजस्थान तथा पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में क्रमशः मात्र 11.80 पॉइंट. .40 को वोकेशनल ट्रेनिंग दी गई है

यूपी के जिलों में 2021 में एक भी जेल ब्रेक की घटना नहीं हुई

एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार यूपी के जिलों में जेल ब्रेक का कोई मामला 2021 में घटित नहीं हुआ जबकि महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे जेलों में जेल ब्रेक की क्रमशः 5 व 6 घटनाएं हुई है इसके अतिरिक्त बंदियों के पलायन की दृष्टि से यूपी राज्य का देश में 13 स्थान है

बंदियों को कंप्यूटर प्रशिक्षण में यूपी की जेलें देश में प्रथम स्थान

एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार 2021 में यूपी के जेलों में बंदियों को प्रदान करने के मामलों में उत्तर प्रदेश का स्थान देश में प्रथम है उत्तर प्रदेश में 1162 बंदियों को कंप्यूटर में दक्ष किया गया है

बंधुओं को उच्च शिक्षा प्रदान करने में यूपी देश में अव्वल

बंधुओं को उच्च शिक्षा प्रदान करने के मामले में भी एनसीआरबी के आंकड़ों ने यूपी के जिलों को प्रथम स्थान दिया है उत्तर प्रदेश की जेलों में बंदियों को उच्च शिक्षा प्रदान करने के मामले में भी प्रथम स्थान प्राप्त किया है एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार यूपी के जिले देश में प्रथम हैं कुल 4101 बंदियों को यूपी के जिलों में वर्ष 2021 के दौरान उच्च शिक्षित किया गया है

बंदियों के सुधार और पुनर्वास हेतु जिलों में एनजीओ के योगदान में यूपी देश में प्रथम

जेल में निरुद्ध बंदियों के दशा और दिशा सुधारने के लिए एडीजी कारागार आनंद कुमार लगातार प्रयास कर रहे हैं यह उनके प्रयासों का ही असर है कि यूपी की जेलों को एनसीआरबी ने बंदियों के सुधार और पुनर्वास हेतु एनजीओ की मदद से योगदान का प्रथम स्थान दिया है एनसीआरबी के ताजा आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 के दौरान बंधुओं के सुधार एवं पुनर्वास के कार्यों में गैर सरकारी संस्थाओं को प्रोत्साहित करके उनके सहयोग से जेलों में बंदियों के सुधार एवं पुनर्वास का कार्य कराया गया यूपी में वर्तमान में कुल 96 एनजीओ काम कर रहे हैं जिसमें 52 विशिष्ट रूप से जेलों में दूध महिलाओं और उनके साथ अनुरोध 6 वर्ष तक के बच्चों के स्वास्थ्य कल्याण सुधार और पुनर्वास के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं एनजीओ के सहयोग से जेलों में निरूद्ध महिलाओं को और उनके बच्चों के कल्याण की दृष्टि से उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं इस दृष्टि से यूपी की जेलों का स्थान देश में सर्वोच्च है

जेल में निरुद्ध निरक्षर बंदियों को पढ़ाने के लिए भी जेल प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है जिन्होंने बंदियों को शिक्षित और साक्षर बनाने के मामले में भी उत्तर प्रदेश का देश में द्वितीय स्थान मिला है यहां की जेलों में 5292 प्रौढ़ बंदियों को उत्तर प्रदेश की जेलों में साक्षर एवं शिक्षित किया गया है।

देश में चौथे स्थान पर है यूपी का जेल उद्योग

एनसीआरबी के वर्ष 2021 की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश की जेलों ने बंदियों द्वारा उत्पादित वस्तुओं की बिक्री से रुपए 15.4 करोड़ का लाभ अर्जित करके यूपी ने देश में चौथा स्थान प्राप्त किया है । उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र पंजाब जैसे उद्योगों की दृष्टि से अग्रणी राज भी जेलों में उद्योगों के सफल संचालन के मामले में उत्तर प्रदेश से काफी नीचे हैं महाराष्ट्र में रुपए 12.75 करोड़ों एवं पंजाब ने 1.33 करोड़ का ही लाभ अर्जित किया है और यह राज रमसा पांचवे एवं 18वें स्थान पर हैं

यूपी के जिलों में अननेचुरल मृत्यु और पलायन की संख्या बेहद कम

एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार यह दृष्टिगत रखते हुए की उत्तर प्रदेश की जेलों में देश की जेलों के सापेक्ष लगभग 22% बंदी निरुद्ध हैं और बंदियों को जेल में रखने की क्षमता की दृष्टि से उत्तर प्रदेश की जेलों में लगभग 184.8% ओवरक्राउडिंग है इसके बावजूद आत्महत्या हत्या जैसे मामलों की संख्या यूपी की जेलों में अन्य राज्यों के मुकाबले उल्लेखनीय रूप से कम है जिसका वर्णन निम्न वत है
1- उत्तर प्रदेश के जिलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सीसीटीवी कैमरा मुख्यालय में वीडियो बॉल आधुनिक उपकरणों तथा निरंतर चौकसी के बेहतर उपयोग से जिलों में सुशासन स्थापित किया गया तथा आत्म हत्या हत्या व अन्य कारणों से होने वाली अप्राकृतिक मृत्यु के मामलों को नियंत्रित करने में पूर्णता सफलता हासिल की है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार अप्राकृतिक मृत्यु की दृष्टि से यूपी की जेलों का वर्णन देश में 11 स्थान है

2 – बंदी पलायन

यह दृष्टिगत रखते हुए की बंदी संख्या में मामलों में उत्तर प्रदेश का स्थान देश में प्रथम है इसके बाद भी बंधुओं के पलायन की दृष्टि से उत्तर प्रदेश का देश में 13 बार स्थान है जबकि उत्तर प्रदेश की तुलना में काफी कम बंदी जनसंख्या वाले राज्यों में बंदी पलायन की काफी घटनाएं हुई हैं राजस्थान का देश में तीसरा तथा पंजाब का नौवां स्थान है।देखिये पूरी खबर ,, हमारे चैनल : upnewssirfsach

https://youtu.be/8f4WeCBmkyI

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