रिपोर्ट बबलू सेंगर

Jalaun news today । रमजान के पाक महीने के आखिरी जुमे को अलविदा जुमे के रूप में मनाया जाता है। इस खास मौके पर नगर की विभिन्न मस्जिदों में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने इबादत की और अल्लाह से रहमत और बरकत की दुआ मांगी। इस अवसर पर नगर की सुन्नी जामा मस्जिद, मरकज जामा मस्जिद, तकिया वाली मस्जिद, हुसैनी मस्जिद, वाले वाली मस्जिद, मदरसा मस्जिद, मोती मस्जिद, सुब्हानी मस्जिद, इमाम चौक मस्जिद सहित अन्य मस्जिदों में विशेष नमाज अदा की गई। इस बीच सुरक्षा व्यवस्था भी चाक चौबंद रही।
अलविदा जुमे की अजान होते ही मस्जिदों में नमाजियों का आना शुरू हो गया था। लोग वुजू कर सफेद लिबास में मस्जिदों की ओर रवाना हुए। इमामों ने तकरीर कर रमजान की फजीलत और इस्लामी शिक्षाओं पर रोशनी डाली। अलविदा जुमे की नमाज से पहले इमामों ने तकरीर पेश की, जिसमें उन्होंने रमजान के महत्व और इससे मिलने वाली बरकतों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि रमजान सिर्फ रोजे रखने का महीना नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और गरीबों की मदद का अवसर भी है। इस महीने में की गई इबादतों का कई गुना सवाब मिलता है और अल्लाह अपने बंदों की दुआएं कबूल करता है। मौलाना उवैश ने तकरीर करते हुए कहा, रमजान हमें संयम और भाईचारे का संदेश देता है। हमें चाहिए कि हम सिर्फ खुद की नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की भी फिक्र करें और उनकी मदद करें। मौलाना साबिर ने तकिया मस्जिद में कहा कि रमजान और जुमे का दिन दोनों ही मुसलमानों के लिए बरकतों से भरे होते हैं। यह महीना नेकियों को बढ़ाने और गुनाहों से बचने का है। सुब्हानी जामा मस्जिद में मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि जो लोग अल्लाह की राह में सदका और जकात देते हैं, अल्लाह उन्हें कई गुना इनाम देता है। नगर की प्रमुख मस्जिदों में मरकज जामा मस्जिद, सुन्नी जामा मस्जिद, तकिया वाली मस्जिद, हुसैनी मस्जिद, मोती मस्जिद आदि में नमाजियों का सैलाब उमड़ा। नमाज के बाद सभी ने देश-दुनिया में अमन-शांति, भाईचारे और खुशहाली की दुआ की।




