बेजुबान की मौत पर इंसानियत हुई जिंदा: सड़क हादसे में मरे बंदर का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार, संवेदना की मिसाल बने सुलखान यादव

अज्ञात वाहन की टक्कर से मौके पर गई जान, चालक बिना रुके हुआ फरार; राहगीरों ने जताया रोष

ब्यूरो रिपोर्ट

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Jalaun news today । कभी-कभी कुछ घटनाएं केवल हादसा नहीं होतीं, बल्कि समाज को यह सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि आखिर इंसानियत बची कितनी है। रविवार 21 जून को जालौन-उरई रोड स्थित एचपी पेट्रोल पंप एवं हीरो एजेंसी के सामने एक बेजुबान बंदर तेज रफ्तार अज्ञात चार पहिया वाहन की चपेट में आ गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि बंदर सड़क पर गिर पड़ा और उसके मुंह से खून निकलने लगा। कुछ ही पलों में उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के बाद वाहन चालक ने न तो गाड़ी रोकी और न ही घायल बेजुबान की ओर पलटकर देखा। वह मौके से फरार हो गया। घटना को देखकर आसपास मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं और उन्होंने चालक की इस संवेदनहीनता पर नाराजगी जताई।
घटना की सूचना मिलते ही बजरंग दल के सक्रिय कार्यकर्ता सुलखान यादव मौके पर पहुंचे। उन्होंने सड़क पर पड़े मृत बंदर को सम्मानपूर्वक उठाया, कपड़े में लपेटकर अपने साथ ले गए और धार्मिक परंपराओं के अनुसार उसका स्नान कराकर विधिवत अंतिम संस्कार (दफन) कराया।
सुलखान यादव की इस मानवीय पहल की क्षेत्रभर में सराहना हो रही है। लोगों का कहना है कि जहां एक ओर वाहन चालक अपनी जिम्मेदारी से भाग गया, वहीं दूसरी ओर सुलखान यादव ने यह साबित कर दिया कि संवेदनाएं केवल इंसानों तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि बेजुबान जीवों के प्रति भी हमारा नैतिक दायित्व है।
इस घटना ने एक बार फिर सड़क पर वाहन चलाने वालों की लापरवाही और जीव-जंतुओं के प्रति घटती संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं सुलखान यादव का यह कार्य मानवता, करुणा और जीव प्रेम का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया है।