बजट सत्र में कांग्रेस ने युवाओं की बेरोजगारी और रोजगार प्रशिक्षण में लापरवाही का मुद्दा उठाया,कही यह बात

योगी सरकार को युवाओं के रोजगार की चिंता नही, सिर्फ निजी कंपनियों को फायदा पहुंचा रही – आराधना मिश्रा मोना, नेता विधानमंडल दल कांग्रेस

UP vidhansabha satra। यूपी में चल रही विधानसभा के बजट सत्र में आज नेता विधानमंडल दल कांग्रेस आराधना मिश्रा मोना ने आज बजट सत्र के दौरान विधानसभा में प्रदेश के युवाओं के कौशल विकास और रोजगार सृजन को लेकर स्थापित प्रशिक्षण संस्थानों (आई.टी.आई )राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों का मुद्दा उठाया, और साथ ही किसानों के हितों और कृषि का मुद्दा उठाया साथ ही कृषि दुर्घटना बीमा धनराशि 5 लाख को बढ़ाने की मांग की, आराधना मिश्रा मोना ने प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षण न मिलने को लेकर सरकार को घेरा और निजी क्षेत्र में प्रशिक्षण संस्थानों के सौंपें जाने पर सरकार द्वारा लापरवाही का आरोप लगाते हुए , निजी कंपनियों द्वारा युवाओं पर मंहगें फीस का बोझ पड़ने की चिंता व्यक्त की ।
नेता विधानमंडल दल आराधना मिश्रा मोना ने कहा की जो राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान कांग्रेस की सरकारों में ग्रामीण क्षेत्रों में खोले गए थे, जिससे ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को प्रशिक्षण के बाद एक अच्छे वेतन की नौकरी या स्वरोजगार का अवसर मिलता था, उसको भाजपा सरकार समाप्त करने पर तुली है, योगी आदित्यनाथ सरकार में सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों ( ITI) के प्रति लापरवाही के साथ-साथ प्रशिक्षण संस्थानों का निजीकरण शुरू कर दिया गया है जिससे ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं पर पड़ने वाला मंहगा प्रशिक्षण शुल्क प्राइवेट कंपनियों द्वारा वसूलने को लेकर सरकार के द्वारा नियंत्रण का कोई इंतजाम नही है, आराधना मिश्रा मोना ने कहा ग्रामीण क्षेत्र में ज्यादातर किसान के बच्चे रोजगार हेतु औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों ( ITI ) में प्रशिक्षण लेते थे , जहां सरकारी ITI की फीस लगभग 700 से ₹1000 रुपये होती थी और छात्रों को स्टाइपेंड (भत्ता) देकर प्रशिक्षण हेतु प्रोत्साहित किया जाता था, जिससे युवा रोजगार की तरफ रुचि बढ़ाएं, लेकिन भाजपा सरकार ने उन औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों का निजीकरण करके उन युवाओं को धोखा देने का काम किया है , क्योंकि अब निजी कंपनियां जो पी.पी.पी. मॉडल पर आई.टी.आई. प्रशिक्षण संस्थानों को संचालित करेगी वहां 70% सीटें प्राइवेट कोटे से भरी जाएगी, ऐसे में वह मनमानी महंगी फीस ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं से वसूलेंगे, जिसका बोझ किसान परिवारों पर आएगा,निजी कंपनियों की मनमानी प्रदेश के युवाओं पर भारी पड़ने वाली है।

आराधना मिश्रा मोना ने किसानों की समस्याओं और कृषि से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए सदन में कहा कृषि के लिए आवंटित पिछले बजट 2025 और 2026-27 , का मात्र 45 प्रतिशत ही खर्च हो सका, यदि बजट पूरा खर्च होता तो किसानों का और भला हो सकता था, सरकार MSP पर फसल खरीददारी को सुनिश्चित करे, और जो MSP पर फसल खरीद की अंतिम तारीख 28 फरवरी को ओर आगे बढ़ाने की बात कही, छुट्टा जानवरों की बड़ी समस्या है, आराधना मिश्रा मोना ने कृषि दुर्घटना बीमा की धनराशि को 5 लाख को और बढ़ाने की मांग की, आराधना मिश्रा मोना ने कहा यूरिया और डी.ए.पी. की बोरी का वजन घटा दिया गया और दाम बढ़ा दिए गए ।
आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि निजी क्षेत्र के खोले जा रहे औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों की फीस का निर्धारण सरकार द्वारा किया जाए जिससे गरीब और मध्यवर्ग के बच्चों के हितों की रक्षा हो सके ।


आराधना मिश्रा मोना ने कहा 45 साल में प्रदेश में सबसे ज्यादा बेरोजगारी है ऐसे में प्रशिक्षित युवा अपने लिए रोजगार की तलाश करते हैं लेकिन सरकार उनको लेकर बिल्कुल गंभीर नहीं और इसके आंकड़े और जवाब सरकार ने खुद दिए हैं कि 8 वर्षों में 37 राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान स्वीकृत किए गए जिसमें से 32 के भवन बने, लेकिन अभी तक सिर्फ भवन बने खड़े हैं ना तो वहां प्रशिक्षण हो रहा है ना रोजगार के अवसर मिल रहे हैं, एक आईटीआई को बनाने में 10 करोड़ से ज्यादा का खर्च आता है, लेकिन यदि वहां प्रशिक्षण ना हुआ तो वह किस काम के इसको लेकर कोई समयबद्ध योजना सरकार की तरफ से नहीं की गई है ।
कुछ प्रशिक्षण संस्थानों का उदाहरण देते हुए आराधना ने कहा हिंदुस्तान लेटेस्ट नाम की कंपनी को प्रतापगढ़, इटावा, बाराबंकी , कन्नौज और देवबंद के संस्थानों का संचालन दिया गया है लेकिन वहां अभी तक वहां प्रशिक्षण कक्षाएं शुरू नहीं हों पायी, प्रतापगढ़ के लालगंज में 2017 से भवन बनकर खड़ा है, लेकिन 9 वर्षों के बाद भी आज भी वहां प्रशिक्षण हेतु कक्षाएं शुरू नहीं हो पाई , और छात्रों को वही कालेज अलॉट कर दिए जहां प्रशिक्षण नहीं हो रहा, जिसकी वजह से उन्हें जिला मुख्यालय जाना पड़ रहा है जिसमें समय की बर्बादी और पैसे की बर्बादी हो रही है , ऐसी एजेंसियों की संचालन जवाब देही तय होनी चाहिए ।


आराधना मिश्रा मोना ने प्रशिक्षण संस्थानों (आई.टी.आई.) में स्टाफ की समस्या को उठाते हुए कहा कि एक आईटीआई में 30 से ज्यादा अनुदेशक, एक प्रधानाचार्य, तीन कार्यदेशक और 7 प्रशासकीय अधिकारी और नौ चतुर्थ श्रेणी सफाई कर्मचारी चाहिए होते हैं, इन पदों पर अभी तक कोई भर्ती नहीं हुई है, तो बिना भर्ती के, बिना शिक्षकों और स्टाफ के यह संस्थान कैसे चलेंगे ? युवाओं का भविष्य अधर में लटकाने से कोई भी राज्य प्रगति नहीं कर सकता ।
नेता विधानमंडल दल आराधना मिश्रा मोना ने इन सभी आईटीआई संस्थानों को शीघ्र चालू करने और संचालन हेतु स्टाफ भर्ती की मांग की, और संचालन कर रही एजेंसियों की जवाब देही की मांग करते हुए फीस पर सख्त नियंत्रण सरकार के द्वारा नियंत्रण रखने की मांग की ।