रिपोर्ट बबलू सेंगर

Jalaun news today । जालौन क्षेत्र के शनिधाम मंदिर में छठवें दिन की रामकथा में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों के बारे में कथा वाचक गुरूपसाद ने बताया।
गूढ़ा न्यामतपुर स्थित शनिधाम मंदिर में आयोजित श्रीराम कथा के छठवें दिन का आयोजन भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ। कथा वाचक गुरुप्रसाद ने भगवान श्रीराम के जीवन के महत्वपूर्ण प्रसंगों पर विस्तार से प्रकाश डाला और श्रोताओं को मर्यादा, प्रेम, त्याग और धर्म के गूढ़ अर्थ समझाए। उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन में आए संघर्षों, उनके धैर्य और न्यायप्रियता की विशेष चर्चा की। उन्होंने बताया कि रामचरितमानस केवल एक धार्मिक ग्रंथ ही नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला ग्रंथ है। श्रीराम का जीवन हमें यह सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और सत्य का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने वनवास प्रसंग को विशेष रूप से प्रस्तुत करते हुए बताया कि किस प्रकार भगवान राम ने पिता के वचन की मर्यादा रखते हुए राजसुख त्याग दिया और वन की ओर प्रस्थान किया। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने श्रद्धालुओं को यह संदेश दिया कि जीवन में कठिनाइयां आएंगी, लेकिन अपने कर्तव्यों और मूल्यों से विचलित नहीं होना चाहिए। शनिधाम मंदिर में उपस्थित श्रद्धालुओं ने कथा के दौरान भगवान राम के आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। कथा के दौरान कई बार श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए और जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। इस मौके पर पुजारी बृजेश तिवारी, अनुभव, विनोद, विनय, आशीष, महेंद्र, गोलू, अनिल, अशोक, मुन्ना, जानकी, रागिनी, आरती आदि मौजूद रहे।




