लखनऊ कमिश्नरेट पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी : भांजे ने रची थी डकैती की साजिश, पुलिस ने किया खुलासा

Lucknow Commissionerate Police got a big success: Nephew had hatched the conspiracy of robbery, police revealed

डकैती में शामिल नौ बदमाश गिरफ्तार

Lucknow news today । यूपी की राजधानी लखनऊ के दुबग्गा में बोरिंग ठेकेदार मोतीलाल के घर डकैती की वारदात को अंजाम देने में नौ बदमाश शामिल थे। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर गुरुवार को वारदात का खुलासा कर दिया। डकैतीकांड में मुख्य साजिशकर्ता मोतीलाल का सगा भांजा विकास ही था। जबकि अन्य आरोपियों में एक वकील और हत्या की सजा काट चुका अपराधी भी है। पीड़ित ने पांच लाख नगद और चार लाख के जेवर लूटे जाने का दावा किया था। वहीं बदमाशों का कहना है कि मोतीलाल के घर से दो लाख रुपए और सिर्फ 400 ग्राम चांदी ही मिली थी। पुलिस ने सभी को जेल भेज दिया है।

बरामद सामान

डीसीपी ने मीडिया को दी विस्तार से जानकारी

डीसीपी पश्चिम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी ये जानकारी

डीसीपी पश्चिम राहुल राज ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में हरदोई मल्लावां निवासी विकास पाल, पारा के सोना विहार कालोनी निवासी ऋषिकांत तिवारी, उन्नाव के औरास निवासी सरवन, जमील, तालकटोरा के बादशाह खेड़ा निवासी दिव्यांश भारती उर्फ केके, पारा भपटामऊ निवासी तरूण बाजपेई, कैफ अहमद निवासी भपटामऊ, डिप्टीखेड़ा निवासी नमन मिश्रा और उन्नाव के मोतीनगर निवासी संजय बाजपेयी है। डीसीपी ने बताया कि एक बदमाश ने मोतीलाल व उसकी नातिन नैना को घटना के दिन बंधक बनाया था। बदमाश ने नैना का नाम लेकर कहा था कि इसे चाभी का पता होगा। नैना ने ही बताया था कि बदमाश उसका नाम ले रहे थे। इससे ही पुलिस को लग गया था कि घटना में करीबी का हाथ है। इसके बाद ही पुलिस ने करीबियों के मोबाइल नम्बर व उनकी गतिविधियों पर नजर रखना शुरू किया। दुबग्गा पुलिस ने पांच किमी. की परिधि की हर लिंक रोड और आस पास सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू किया। इससे ही एक वैगन आर कार संदिग्ध दिखी। यह घटना से एक दिन पहले भी उसी स्थान पर उसी समय आई थी। इसके बाद पुलिस ने मोतीलाल, नैना व अन्य सदस्यों से फिर पूछताछ की। इस दौरान घटना के दिन बाहर गए नाती से भी पूछताछ की गई तो सामने आया कि एक दिन पहले 6 अक्तूबर को कुछ लोग घर के पास दिखे थे। नाती ने उन लोगों को टोका था तो वह लोग लघुशंका करने के लिए आने की बात कहकर वहां से भाग निकले थे। इस कार नम्बर के आधार पर गाड़ी मालिक की पहचान आशियाना निवासी एक व्यक्ति के रूप में हुई। उसने बताया कि कार आलमबाग निवासी ऋषिकांत तिवारी ओला में चलाता था। ऋषिकांत 8 अक्टूबर को कार खड़ी कर गया था। उसने कहा था कि अब गाड़ी नहीं चलाना है। इस पर पुलिस ने ऋषिकांत को हिरासत में लिया था।
पुलिस के अनुसार आरोपी ओला चालक ऋषिकांत ने पूछताछ में पूरी घटना बयां कर दी। उसने बताया कि परिचित सरवन यादव ने लूट की घटना के लिए सम्पर्क किया था। उसने कार लेकर चलने को कहा था। उसे बताया गया था कि 20-25 लाख रुपए की लूट करनी है। जो रकम हाथ आयेगी, वह सभी को बराबर-बराबर बांटी जाएगी। सरवन ने बताया कि उसके खिलाफ कई मुकदमे है जिसकी पैरवी वकील संजय बाजपेयी करता है। संजय ने उसे कुछ लोगों को साजिश में शामिल करने को कहा था। संजय ने साथ रहने वाले अपने भांजे नमन और उसके दोस्त तरुण मिश्र को भी घटना में शामिल किया था। तरुण पहले से मोतीलाल के भांजे विकास को जानता था।
एडीसीपी चिरंजीव नाथ सिंह ने बताया कि आरोपी सूत्रधार विकास व तरुण ने सबको बताया था कि मोतीलाल ने पुराना मकान 90 लाख में बेचा है। उसके घर पर 25 लाख रुपए से अधिक रकम है। विकास ने घटनास्थल दिखाया था। सभी को हिदायत थी कि मोबाइल बंद कर लेना है। सबके मोबाइल एक जगह पर बंद कराकर रखवा दिये गये थे। सिर्फ ड्राइवर को मोबाइल रखने को दिया गया था, ताकि जरूरत पड़ने पर सम्पर्क किया जा सके।

यह हुआ बरामद

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