रिपोर्ट बबलू सेंगर

E-Magzine – उत्तम पुकार न्यूज़
Jalaun news today । गुरू की महत्ता हमारे जीवन में अनुपम है क्योंकि गुरू के बिना हम जीवन का सार ही नहीं समझ सकते हैं। लेकिन हमेशा इस बात का सदैव ही ध्यान रखना चाहिए कि गुरू के समक्ष चंचलता नहीं करनी चाहिए। जितनी आवश्यकता है उतना ही बोलें और जितना अधिक हो सके गुरू की वाणी का श्रवण करें। यह बात अक्षदा ग्रीन सिटी पर आयोजित श्रीमदभागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास अंकित शास्त्री ने कही।
चुर्खी रोड पर अक्षदा ग्रीन सिटी में आयाजित श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास अंकित शास्त्री महाराज ने कहा कि गुरू चरणों की सेवा का अवसर मिलना परम सौभाग्य होता है, जो अनमोल है। इसलिए गुरू सेवा को समर्पित भाव से करना और उनका आदेश का पालन सदा ही करना चाहिए। गुरू की महिमा अपार है और उनकी करूणा अदभुत है कब किस पर अनुग्रह हो जाएं। प्रभु के अवतार प्रयोजन पर कहा कि प्रभु किसी राक्षस, दानव और अधर्मी का वध करने के लिए ही अवतरित नहीं होते हैं बल्कि अपने भक्तजनों पर कृपा बरसाने के आते हैं। रावण, कंस को मारने के लिए भगवान को अवतार लेने की जरूरत नहीं थी। उन्होंने कहा कि घर द्वार छोड़कर वन में चले जाने ही वैराग्य नहीं होता बल्कि अपने अंतःकरण की शुद्धता इसमें नितांत आवश्यक है। हमारे जीवन में विचारों का आदान प्रदान रोम-रोम से होता है इसके लिए सिर्फ नाक, कान और आखें ही नहीं होती हैं। संत महात्मा की दृष्टि को दिव्य बताते हुए कहा गया कि हम उतना ही देख सकते हैं जितनी दूर तक हमारी दृष्टि जाती है, लेकिन संत जन अनंत तक देखने की दृष्टि रखते हैं। इस मौके पर परीक्षित कमला, राजबहादुर, काजू महाराज, विजय वर्मा, राजा सिंह सेंगर गधेला, वाचस्पति मिश्रा, रेनू, बृज किशोर, संजीव, कैलाश, राजाबाबू, रामशंकर, गंगाराम, विशाल कृष्णा, पिंकी, हरकुंवर, सरिता, पूजा, आलोक, कौशल, देवर्षि, राजाबाबू, संतोष आदि रहे।





