जालौन के इस दरगाह पर चल रहे उर्स का हुआ समापन,,जायरीनों ने पढ़ी फातिहा

रिपोर्ट बबलू सेंगर

Jalaun news today । जालौन नगर के तकिया मैदान पर आयोजित हजरत सुखचैन शाह बाबा की दरगाह पर शुक्रवार को दूसरे व शनिवार को तीसरे दिन दम मदार बेड़ा पार की गूंज के साथ तीन दिवसीय उर्स का समापन हो गया। जायरीनों ने दरगाह पर फातिहा पढ़ी और चादर चढ़ाकर अमन चैन की दुआ मांगी।
नगर में तकिया मैदान के पास हजरत सैय्यद सुखचौन शाह बाबा की दरगाह है। दरागाह पर तीन दिवसीय 71वें उर्स में जायरीनों के आने और दरगाह पर चादर चढ़ाने का सिलसिला जारी रहा। जिंदाशाह मदार की दरगाह के सज्जादानशीं मुजीबुल बाकी ने भाईचारे का पैगाम देते हुए कहा कि इंसान उसे कहते हैं जिसके पास इंसानियत है, हाथ पैर तो जानवरों के भी होते हैं। पड़ोसी को तकलीफ हो और हमारा दिल बेचैन हो जाए तो समझो हम इंसान हैं। कहा कि माता-पिता की सेवा जन्नत का रास्ता बनाती है। इसलिए उन्हें कभी भी तकलीफ मत देना। हमेशा उनके आदेशों पर अमल करें और उनकी सेवा करना न भूलें। इसके बाद हजरत सैयद सुखचैन शाह बाबा की चादर व गागर जुलूस निकाला गया। जो ताकिया मैदान, झंडा चौराहा, पानी की टंकी व सब्जी मंडी होकर अस्ताने मुबारक पर पुंचा, जहां चादर पेश की गईं। इससे पहले शायरे इस्लाम मुहाफिज अली ने पढ़ा कि मुकद्दर जगमगाना चाहता हूं, मदीना मैं भी जाना चाहता हूं। शायरे इस्लाम सैय्यद मुजीब जाफरी ने कहा कि दुनिया के साथ दौलते, उकबा लिए हुए, लौटा दरे-रसूल से क्या-क्या लिए हुए, महशर का सामना मैं करूंगा खुदा कसम, अपने नबी का सिर्फ भरोसा लिए हुए। अख्तर रजा सुल्तानी ने कहा कि बड़े लतीफ हैं नाजुक से घर में रहते हैं, मेरे हुजूर मेरी चश्मे-तर में रहते हैं, यकीन वाले कहां से कहां तलक पहुंचे। नौजवान शायर गुलाम जिलानी ने नातिया कलाम से महफिल लूट ली। बादलों में हिलाल आ गया है, क्या नबी का बिलाल आ गया है, रो रहे हैं शबो-रोज आका, उम्मती का खयाल आ गया। शहर काजी साबिर अली रिफाकती नें आए हुए उलमाए इकराम का इस्तकबाल करते हुए कहा कि आप लोग सुखचैन शाह बाबा के उर्स मे आये है तो उनसे कुछ सीख ले। अंत मे कमेटी के सरपरस्त इम्मन शाह नें कमेटी के पदाधिकारियों की हौसला अफजाई की। इस मौके पर अफरोज शाह, वकील शाह, नईम शाह, शाहिद शाह, गुलफीद शाह, अशफाक बाबा, अली आदिल खान, आकाश, अनीस, परवेज, जाकिर शाह मौजूद रहे।

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