बच्चों को असाध्य रोगों से भी बचाता है टीका

वैक्सीन सुरक्षित, टीके से न डरे अभिभावक

(अमित चतुर्वेदी)

औरैया । गत वर्षों में प्रदेश भर में टीके का सही रखरखाव और पहुँच को बनाये रखने में इफेक्टिव वैक्सीन मैनेजमेंट (इवीएम) की अहम भूमिका रही है| इवीएम मूल्यांकन 2022 की रिपोर्ट में जनपद ने प्रदेश से भी बेहतर प्रदर्शन किया है| जहाँ ग्लोबल इंडेक्स में भारत का 80 प्रतिशत अंक हैं, उत्तरप्रदेश का 83 प्रतिशत अंक है तो वहीँ औरैया जनपद इससे भी आगे 89 प्रतिशत अंक पर है।

प्रदेश भर में सुचारू रूप से चल रहे टीकाकरण अभियान को सफ़ल बनाने में इवीएम की अहम भूमिका है| इसके अंतर्गत टीके के रखरखाव से लेकर उसके लाने ले जाने, और सत्र स्थल पर सही टीका लगाने की ज़िम्मेदारी होती है| ईविन के माध्यम से वैक्सीन स्टाक की मौजूदा स्थिति, निर्माता, निर्माण एवं एक्सपायरी डेट के साथ रीयल टाइम तापमान को भी देखा जा सकता है। वैक्सीन के लिए उपयुक्त तापमान के अभाव में कोल्ड चेन हैंडलर के मोबाइल पर एक निर्धारित समय अंतराल पर अलर्ट मैसेज भेजता है और वैक्सीन को सुरक्षित करने के लिए बताया जाता है। वैक्सीन का स्टाक निर्धारित स्टाक से कम या ज्यादा होने, वैक्सीन की अवसान तिथि (एक्सपायरी डेट) नजदीक होने पर भी यह संदेश भेजा करता है, जिससे समय रहते वैक्सीन स्टाक को अनुरक्षित किया जा सके।

हर साल 16 मार्च राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस पहली बार 16 मार्च 1995 को मनाया गया था। इस दिन भारत में वर्ष 1995 में मुंह के माध्यम से पोलियो वैक्सीन की पहली खुराक दी गई थी। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. अर्चना श्रीवास्तव बताती हैं कि शून्य से पांच साल तक के बच्चों को जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण बहुत जरुरी है| कोविड व अन्य कारणों की वजह से नियमित टीकाकरण में छूटे बच्चों को विशेष टीकाकरण अभियान चलाकर आच्छादित किया जा रहा है| उन्होंने सभी अभिभावकों से अपील की है कि टीकाकरण पूर्णरूप से सुरक्षित है, अतः सभी अपने शून्य से पांच वर्ष के टीकाकरण से छूटे हुए बच्चों को टीका ज़रूर लगवाएं।

जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ राकेश सिंह बताते हैं कि विशेष टीकाकरण अभियान के तीन चरण चलाये जाने थे, जिसमें से दो चरणों में लगभग 50 प्रतिशत से अधिक बच्चों को टीका लगाया जा चुका है| 13 मार्च से तीसरा चरण चलाया जा रहा है| उन्होंने कहा की टीके लगवाने के दिन अगर बच्चा मामूली रूप से बीमार रहे मसलन सर्दी-जुकाम, दस्त या किसी अन्य बीमारी से पीड़ित हो तब भी उसे समयानुसार टीके लगवाना सुरक्षित है। शिशु को लगने वाला कोई टीका पकता है और किसी को बुखार आता है या दर्द होता है तो ऐसी स्थिति में घबराएं नही। टीबी की बीमारी से बचाने वाला बीसीजी टीका पक भी सकता है। टीका पकना या बुखार आना यह बताता है कि टीके ने अपना काम कर दिया है। और अब बच्चा उस बीमारी से बचा रहेगा। शिशु को टीके लगवाते समय अभिभावकों, परिजनों को एएनएम दीदी से टीके के प्रभाव के बारे में पूछना चाहिए। हर मां-बाप अपने बच्चों की टीकाकरण की तारीख व दिन याद रखें।

याद रखे

1- बच्चों मे बीसीजी का टीका, पेंटावैलैंट के टीके की तीन खुराके, पोलियो की तीन खुराकें व खसरे का टीका उनकी पहली वर्षगांठ से पहले अवश्य लगवा लेना चाहिए।
2- यदि भूलवश कोई टीका छूट गया है तो याद आते ही स्वास्थ्य कार्यकर्ता/चिकित्सक से संपर्क कर टीका लगवाएं। यह सभी टीके उप स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक-सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला महिला अस्पताल पर नि:शुल्क उपलब्ध हैं। (ये सभी टीके जिला अस्पताल पर सप्ताह के सातो दिन व नगरीय स्वास्थ्य केंद्र पर मंगलवार से रविवार को मुफ्त उपलब्ध है)
3- टीके तभी पूरी तरह से असरदार होते हैं जब सभी टीकों का पूरा कोर्स सही उम्र पर दिया जाए।
4- मामूली खांसी, सर्दी, दस्त और बुखार की अवस्था में भी यह सभी टीके लगवाना सुरक्षित है।

क्या कहता है जनपद का राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-05

1- वर्ष 2015-16 में 12 से 23 माह की उम्र के 34 प्रतिशत बच्चों को टीके लगाए जा रहे थे। जबकि 2019-21 यह आंकड़ा बढ़कर 82.5 फीसदी हो गया।
2- 95.6 प्रतिशत बच्चों को 12 स 23 माह की उम्र में बीसीजी से बचाव का टीका लगाया जा रहा है।
3- 12 से 23 माह के 84.7 फीसदी बच्चे पोलियो की खुराक ले चुके होते हैं। जबकि इससे पूर्व यही आंकड़ा 46.6 फीसदी का था।
4 – 89.4 फीसदी बच्चों को खसरा से बचाव के टीके लग चुके होते हैं। इससे पूर्व 67.3 फीसदी बच्चों को ही खसरा से बचाव के टीके लग रहे थे।
5- 12 से 23 माह के 95.8 फीसदी बच्चों का सरकारी अस्पतालों में टीकाकरण हुआ। जबकि 2019-21 में यह आंकड़ा बढ़कर 99.1 फीसदी हो गया।

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