
Lucknow news today उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मंगलवार को राष्ट्रीय महिला आयोग भारत सरकार के सहयोग से दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान द्वारा महिलाओं के लिये आज विधिक साक्षरता द्वारा लिंग संवेदनशीलता एवं महिला सशक्तिकरण पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम विषयक राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई।

उक्त कार्यशाला का आयोजन, मुख्य अतिथि मीनाक्षी नेगी, सदस्य सचिव, राष्ट्रीय महिला अयोग भारत सरकार की गरिमामयी उपस्थिति में, संस्थान के अपर निदेशक बी0डी0 चौधरी द्वारा किया गया। उक्त कार्यशाला में प्रदेश के लखनऊ, बाराबंकी तथा सीतापुर जनपदों की प्रगतिशील महिलाओं द्वारा प्रतिभाग किया गया।
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र समारोह के अवसर पर प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि के रूप में मीनाक्षी नेगी ने महाभारत के द्रौपदी चीरहरण के दृृष्टान्त को उद्धृत करते हुए बताया कि महिलाओं को स्वयं अबला बनकर के रहने की आवश्यकता नही है बल्कि सबला बनने का प्रयास करें। कहने का तात्पर्य यह है कि विधिक साक्षरता द्वारा अपने अधिकारों को जाने तथा संवैधानिक जीवन शैली जीने का प्रयास करें। यहाँ पर उल्लेखनीय विषय यह है कि वर्तमान पुरूष प्रधान परिदृश्य में महिलाओं को अपने संवैधानिक अधिकारों व कर्तव्यों का ज्ञान होना अति आवश्यक है। अतः हम सबको संविधान के नियमों के मार्गनिर्देशन में चलना चाहिए। हम सभी महिला समाज को, तथाकथित व परम्परागत पितृृात्मक सत्तारूपी समाज में अपनी लगाम अपने हाथ में रखनी चाहिए न कि दूसरे के हाथों में। अपनी दिशाओं का निर्माण स्वयं करें तथा उसी कर्तव्य मार्ग पर अग्रसर हो।

अध्यक्षीय सम्बोधन के दौरान संस्थान के अपर निदेशक बी0डी0 चौधरी ने कहा कि महिलाओं को शिक्षा के क्षेत्र में बहुत आगे जाना है क्योंकि हमारे भारतीय समाज में जागरूकता के अभाव के दृृष्टिगत महिलाएँ परंपरागत रूप से शिक्षा क्षेत्र में उपेक्षित रहीं हैं। धीरे-धीरे दूसरे विकसित राष्ट्रों की महिलाओं की शिक्षण व्यवस्था को देखते-देखते, अद्यतन रूप से भारतीय समाज की महिलाओं की शिक्षा व्यवस्था में अत्यधिक परिवर्तन हुआ है तथा सांस्कृतिक और सामाजिक बदलाव भी बड़ी तीव्र गति से हो रहे हैं। इसका प्रभाव सबसे अधिक महिला वर्ग पर दोनो दृृष्टिकोण से पड़ा है, चाहे वो साकारात्क हो या नाकारात्मक। कभी-कभी विभिन्न प्रकार के भ्रमात्मक विचारों व छद्म सुधारों के नाम पर महिलाएँ स्वयं अपनी स्वाभाविक प्रतिष्ठा और सम्मान का क्षरण करती हैं। फलस्वरूप समाज के कुत्सित मानसिकता वाले तत्वों का शिकार हो जाती हैं।
कार्यशाला के दौरान विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ0 सबिहा अहमद, सदस्य राज्य सुन्नी मुस्लिम वक्फ बोर्ड द्वारा मुस्लिम महिला प्रतिभागियों को संबोधित करते हुये बताया कि लिंग असमानता, रूढ़ीवादी परम्पराएँ व वर्षों से चली आ रही कुरीतियों को समूल नाश करने के दृृष्टिगत, सम्मानजनक स्थिति को लाने के लिए तथा मूलभूत अधिकारों को प्राप्त कराने के लिए महिलाओं को जागरूक कराना अति आवश्यक है और यह तभी हो सकता है जब यह हमारी बहनें स्वयं प्रथम दृृष्ट्या अपने अधिकारों को जाने तथा अधिकारों को प्राप्त करने का प्रयास भी करें।

उक्त एक दिवसीय कार्यशाला के अन्तर्गत यथा विभिन्न विषयों- उ0प्र0 में महिलाओं की अद्यतन स्थिति, भारतीय समाज में लिंग भेदभाव एवं पुरूष प्रधानता, पारिवारिक कानून में महिलाओं के दाम्पत्यिक अधिकार, गरीबों व अक्षम लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करना, राष्ट्रीय महिला आयोग- उद्देश्य एवं संस्थागत ढ़ाँचा, कार्य एवं शक्तियाँ, शिकायत निवारण तन्त्र, महिला स्वयं सहायता समूह एवं इसके लाभ तथा महिला सशक्तिकरण हेतु प्रदेश सरकार की कल्याणकारी योजनायें एवं कार्यक्रम इत्यादि पर राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय प्रबुद्ध वार्ताकार यथा- प्रो0 शिरीन अब्बास, सर्वेश पाण्डेय, फरीदा जलीस, एहसन जमील तथा अर्चना द्वारा अपनी उपयोगी वार्ताओं के माध्यम से महिलाओं को लाभान्वित किया गया।
कार्यशाला के आयोजन में कार्यक्रम नियंत्रक डॉ0 नीरजा गुप्ता, डॉ0 रंजना सिंह, सहायक निदेशक, वरूण चतुर्वेदी, संकाय सदस्य डॉ0 अलका शर्मा, अहसन जमील तथा संस्थान के समस्त अधिकारियों और कार्मिकों का सराहनीय योगदान रहा। सम्पूर्ण कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ0 एस0 के0 सिंह, सहायक निदेशक संस्थान द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया।





