समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्या के रामचरित मानस पर दिए गए बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीतिक लगातार गरमाई हुई है। इस मुद्दे को लेकर भाजपा और सपा के मध्य चल रहे वार-पलटवार के दौर के बीच सोमवार को बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने भी टिप्पणी करके सूबे का सियासी पारा बढ़ा दिया है। आज बसपा प्रमुख मायावती ने अखिलेश यादव की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए इस पूरे प्रकरण को बीजेपी और सपा की मिलीभगत करार दिया है। उन्होंने कहा कि जाति और धर्म के आधार पर राजनीति करना बीजेपी की पहचान है लेकिन अब सपा भी उसी रास्ते पर है जोकि दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है।
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बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को ट्विटर के जरिए टिप्पणी करते हुए कहा कि संकीर्ण राजनीतिक व चुनावी स्वार्थ हेतु नए-नए विवाद खड़ा करके जातीय व धार्मिक द्वेष, उन्माद-उत्तेजना व नफरत फैलाना, बायकाट कल्चर, धर्मान्तरण को लेकर उग्रता आदि बीजेपी की राजनीतिक पहचान सर्वविदित है लेकिन रामचरितमानस की आड़ में सपा का वही राजनीतिक रंग-रूप दुःखद व दुर्भाग्यपूर्ण है
उन्होंने सिलसिलेवार ट्वीट करते हुए कहा कि रामचरितमानस के खिलाफ सपा नेता की टिप्पणी पर उठे विवाद व फिर उसे लेकर भाजपा की प्रतिक्रियाओं के बावजूद सपा नेतृत्व की चुप्पी से स्पष्ट है कि इसमें दोनों पार्टियों की मिलीभगत है ताकि आगामी चुनावों को जनता के ज्वलन्त मुद्दों के बजाए हिन्दू-मुस्लिम उन्माद पर पोलाराइज किया जा सके।





