(रिपोर्ट : बबलू सेंगर)

Jalaun news today । यूपी के जालौन जनपद के नगर जालौन में शुक्रवार को कजली मेले में बच्चे, बूढ़े एवं युवाओं के साथ ही महिलाओं ने भी मेले में रौनक बिखेरी।
नगर में पंडित दीनदयाल उपाध्याय चौराहे के पास वर्षों से कजली मेले का आयोजन किया जा रहा है। साथ ही एक दूसरे को कजली (भुजरियां) देकर रक्षा बंधन पर्व की बधाई देते हैं। इसके बाद देर शाम को कजली को मलंगा नाले में विसर्जित कर मेले का समापन किया जाता है।

कोंच चौराहे पर लगे कजली मेले में बच्चों के खिलौने, झूले, चाट, पकौड़े, खजला, लहिया, पट्टी आदि के काउंटर काफी संख्या में लगे जिसमें लोगों की भीड़ नजर आई। इस दौरान पुलिस व्यवस्था भी चाक-चौबंद रही। मेले में इस बार काफी रौनक और भीड़भाड़ नजर आई। लेकिन कटुसत्य यह भी है कि आज की व्यस्ततम जीवन शैली के चलते लोगों का रूझान ऐसे आयोजनों की ओर से विमुख होता चला जा रहा है।

वहीं, मेले के दौरान कोतवाल विमलेश कुमार, चौकी प्रभारी शशांक बाजपेई पुलिस फोर्स के साथ मेले में गश्त करते नजर आए। बुंदेलखंड क्षेत्र में वर्षों से कजली पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता रहा है। दिल्ली नरेश पृथ्वीराज चौहान व महोबा के राजा परमाल से हुए युद्ध के चलते बुंदेलखंड की बेटियां कजली (भुजरियां) को रक्षा बंधन के दूसरे दिन दफन कर सकी थीं। इस युद्ध में आल्हा व ऊदल ने अदम्य साहस दिखाते हुए पृथ्वीराज चौहान की सेना के दांत खट्टे कर दिए थे। इसलिए इस पूरे क्षेत्र में रक्षाबंधन के दूसरे दिन को विजय उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
जालौन में धूमधाम से मनाया गया भुजरियों का त्यौहार
(रिपोर्ट : बबलू सेंगर)
जालौन। रक्षाबंधन के त्यौहार के दूसरे दिन भुजरियों का त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाया गया। जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने तालाब में भुजरियों को विसर्जन कर नाच गायन किया।
नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में रक्षाबंधन के दूसरे दिन भुजरियों का त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाया गया। जिसमें महिलाओं, बच्चों ने अपने घर में बोई हुई भुजरियों को देवी मंदिरों से होते हुए तालाब में विसर्जित की। इस अवसर पर महिलाओं ने खूब नाच गायन किया। तो वहीं, पुरुषों ने भुजरिया लेकर एक दूसरे को बधाई दी व गले मिलकर पुराने गिले, शिकवों को दूर किया। आल्हा खंड के अनुसार जब पृथ्वीराज चौहान ने महोबा को घेर लिया तथा उस पर चढ़ाई करने का विचार किया। तब रानी मल्हना अपने कुल देवता मनिया देव से प्रार्थना की। तब मनिया देव ने उदल को स्वपन दिया कि महोबा पर भारी संकट आ गया उसे बचा लो। तब उदल ने अपने साथी मलखान, सयैद ढेवा समेत सभी लोग साधु के वेश में महोबा गये और पृथ्वीराज से युद्ध कर उन्हें वापस दिल्ली भगा दिया। तब कहीं उदल की बहन चंद्रावल ने भुजरियां को तालाब में विसर्जन किया। तभी से रक्षाबंधन के दूसरे दिन भुजरियां निकालने की परंपरा उसी समय से चली आ रही है।






