(रिपोर्ट – बबलू सेंगर)

Jalaun news today। जालौन में लगभग एक सप्ताह पूर्व उदोतपुरा 132 केबीए बिजलीघर में 40 एमबीए के ट्रांसफार्मर के जलने के बाद बिजली विभाग के कर्मचारियों द्वारा की गई बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था के तहत ग्रामीण क्षेत्र में मात्र पांच से छह घंटे ही बिजली मिल रही है। बारिश न होने और पर्याप्त बिजली न मिलने के चलते नलकूप भी नहीं चल पा रहे हैं। ऐसे में किसानों की धान, मैंथा आदि की फसल सूखने की कगार पर आ चुकी है। परेशान किसानों ने नलकूप चलाने के लिए पर्याप्त बिजली दिए जाने की मांग बिजली विभाग के अधिकारियों से की है।
बीती 27 अगस्त की रात उदोतपुरा स्थित 132 केबी बिजलीघर में रखे 40 एमबीए के ट्रांसफार्मर में अचानक आग लग गई थी। आधा दर्जन दमकल गाड़ियों ने छह घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया था। बिजलीघर में रखे दो 40 एमबीए के ट्रांसफार्मर में एक पूरी तरह जल गया था। जबकि दूसरे को बचा लिया गया था। जिससे सात फीडरों की बिजली आपूर्ति बाधित हुई थी। दो दिन में बिजली कर्मचारियों ने दूसरे ट्रांसफार्मर से वैकल्पिक व्यवस्था के तहत आपूर्ति शुरू कर दी थी। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत ग्रामीण क्षेत्र में पांच से छह घंटे बिजली आपूर्ति दी जा रही है। हालांकि इस गर्मी के मौसम में पांच छह घंटे की बिजली आपूर्ति पर्याप्त साबित नहीं हो रही है। तो दूसरी ओर किसानों ने खेतों में धान, मैंथा, बाजरा, मूगफली, ज्वार आदि की फसल बोई है। इस समय बारिश न होने से फसल पर प्रभाव पड़ रहा है। बिजली न आने से नलकूप भी नहीं चल पा रहे हैं। ऐसे में खेतों में खड़ी फसल सूखने की कगार पर पहुंच गई है। किसान रामसेवक कैंथ, हरिमोहन, मनोज छानी, हरीशंकर धनौरा आदि कहते हैं कि ग्रामीण क्षेत्र के लोग बिजली के संकट से बेहाल हैं। फसल भी बिजली न आने से सिंचाई के अभाव से सूखने की कागार पर है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र में कम से कम इतनी तो बिजली दी जाए कि फसलों की सिंचाई हो सके।






