कंपाला में सोनाली का सुनहरा वार, लखनऊ की शटलर ने रचा अंतरराष्ट्रीय इतिहास

रितिका थकर के साथ सोनाली सिंह ने जीता महिला युगल खिताब, फाइनल में हमवतन जोड़ी को सीधे गेमों में दी मात

विशेष संवाददाता

लखनऊ/कंपाला। लुगोगो इंडोर स्टेडियम में रविवार को भारतीय बैडमिंटन की दो जोड़ियां आमने-सामने थीं, लेकिन जीत के बाद तिरंगा सिर्फ एक जोड़ी के हाथ में था। लखनऊ की सोनाली सिंह और महाराष्ट्र की रितिका थकर ने कंपाला इंटरनेशनल 2026 के महिला युगल का खिताब अपने नाम कर लिया। भारतीय जोड़ी ने फाइनल में इशिता नेगी और अक्षिता मनराल को 21-16, 21-17 से सीधे गेमों में हराकर अंतरराष्ट्रीय सर्किट पर अपनी साझेदारी की मजबूत छाप छोड़ी।

यह सिर्फ एक खिताब की कहानी नहीं है। इसके केंद्र में लखनऊ की वह शटलर है, जो घरेलू कोर्ट पर पसीना बहाने के बाद अब विदेशी कोर्ट पर लगातार अपनी पहचान बना रही है। सोनाली सिंह का यह प्रदर्शन बीबीडी बैडमिंटन एकेडमी की उस प्रशिक्षण व्यवस्था को भी सामने लाता है, जहां तैयार हो रही प्रतिभाएं अब अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में नतीजे देने लगी हैं।

फाइनल में दबाव था, लेकिन खेल में घबराहट नहीं

फाइनल का स्कोर भले ही एकतरफा दिखाई दे, लेकिन भारतीय मुकाबले में दबाव कम नहीं था। सामने परिचित प्रतिद्वंद्वी थीं और दोनों जोड़ियां एक-दूसरे के खेल से अच्छी तरह वाकिफ थीं। ऐसे मुकाबलों में रणनीति के साथ मानसिक मजबूती भी मायने रखती है।

सोनाली और रितिका ने यहीं बाजी मारी। पहले गेम में 21-16 की बढ़त बनाने के बाद उन्होंने दूसरे गेम में भी अपनी लय नहीं टूटने दी। 21-17 की जीत के साथ उन्होंने न सिर्फ मैच समाप्त किया, बल्कि विपक्षी जोड़ी को निर्णायक मोड़ पर वापसी का अवसर भी नहीं दिया।

लखनऊ की अकादमी से कंपाला के पोडियम तक

सोनाली की इस सफलता का सबसे महत्वपूर्ण पहलू उसका लखनऊ कनेक्शन है। शहर की बीबीडी बैडमिंटन एकेडमी में नियमित प्रशिक्षण लेने वाली सोनाली ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह साबित किया है कि उत्तर प्रदेश की बैडमिंटन प्रतिभा अब केवल राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक सीमित नहीं है।

कंपाला की जीत उनके लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि फ्यूचर सीरीज़ जैसे अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट युवा खिलाड़ियों को विश्व रैंकिंग अंक हासिल करने और अंतरराष्ट्रीय सर्किट में अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर देते हैं। ऐसे मंच पर खिताब जीतना केवल ट्रॉफी हासिल करना नहीं, बल्कि आगे की बड़ी प्रतियोगिताओं के लिए दरवाजा खोलना भी है।

सोनाली–रितिका की जोड़ी ने दी नई दस्तक

महिला युगल में सफलता का आधार केवल व्यक्तिगत प्रतिभा नहीं होती। तालमेल, कोर्ट कवरेज, साझेदार पर भरोसा और दबाव के क्षणों में सही निर्णय—इन सबका मेल ही जोड़ी को खिताब तक पहुंचाता है। कंपाला में सोनाली और रितिका ने यही संतुलन दिखाया।

फाइनल में दोनों गेमों में 21 अंक तक पहुंचना और विपक्षी जोड़ी को 16 तथा 17 अंक पर रोकना बताता है कि भारतीय जोड़ी ने महत्वपूर्ण चरणों में बढ़त को हाथ से नहीं निकलने दिया।

अब इस जीत के बाद नजर इस बात पर होगी कि सोनाली–रितिका की यह साझेदारी अंतरराष्ट्रीय सर्किट पर कितनी दूर तक जाती है। कंपाला की ट्रॉफी उनके खाते में दर्ज हो चुकी है; अगली चुनौती इस जीत को निरंतरता में बदलने की है।

और लखनऊ के लिए यह जीत एक और संदेश लेकर आई है—शहर की बैडमिंटन अकादमियों में तैयार हो रही प्रतिभा अब सिर्फ सपने नहीं देख रही, अंतरराष्ट्रीय कोर्ट पर उन्हें हकीकत में बदल रही है।