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रिपोर्ट बबलू सेंगर
Jalaun news today । जालौन के तकिया मैदान पर आयोजित हजरत सुखचैन शाह बाबा की दरगाह पर दम मदार बेड़ा पार की गूंज के साथ दो दिवसीय उर्स की शुरूआत हुई। अकीदतमंदों ने दरगाह पर फातिहा पढ़ी और चादर चढ़ाकर अमन चैन की दुआ मांगी।
नगर में तकिया मैदान के पास हजरत सैय्यद सुखचैन शाह बाबा की दरगाह है। दरागाह पर दो दिवसीय 75वें उर्स में जायरीनों के आने और दरगाह पर चादर चढ़ाने का सिलसिला जारी रहा। मौलाना सलमान कादरी ने भाईचारे का पैगाम देते हुए कहा कि इंसान उसे कहते हैं जिसके पास इंसानियत है, हाथ पैर तो जानवरों के भी होते हैं। पड़ोसी को तकलीफ हो और हमारा दिल बेचौन हो जाए तो समझो हम इंसान हैं। कमनपुर शरीफ से आए हजरत सैयद रज्जाक अली ने कहा कि माता-पिता की सेवा जन्नत का रास्ता बनाती है। इसलिए उन्हें कभी भी तकलीफ मत देना। हमेशा उनके हुक्म पर अमल करें और उनकी सेवा करना न भूलें। इसके बाद हजरत सैयद सुखचैन शाह बाबा की चादर व गागर जुलूस निकाला गया। जो ताकिया मैदान, झंडा चौराहा, पानी की टंकी व सब्जी मंडी होकर अस्ताने मुबारक पर पहुंचा, जहां चादर पेश की गईं। इससे पहले शायरे इस्लाम मुहाफिज अली ने पढ़ा कि मुकद्दर जगमगाना चाहता हूं, मदीना मैं भी जाना चाहता हूं। शायरों ने पढ़ा कि दुनिया के साथ दौलते, उकबा लिए हुए, लौटा दरे-रसूल से क्या-क्या लिए हुए, महशर का सामना मैं करूंगा खुदा कसम, अपने नबी का सिर्फ भरोसा लिए हुए। बड़े लतीफ हैं नाजुक से घर में रहते हैं, मेरे हुजूर मेरी चश्मे-तर में रहते हैं, यकीन वाले कहां से कहां तलक पहुंचे। बादलों में हिलाल आ गया है, क्या नबी का बिलाल आ गया है, रो रहे हैं शबो-रोज आका, उम्मती का खयाल आ गया। शहर काजी मौलाना साबिर अली रिफाकती नें आए हुए उलमाए इकराम का इस्तकबाल किया। इस मौके पर अफरोज शाह, सादिक अली सुखचैनी, जाकिर शाह, नफीस शाह, शानू सूफी, अजमेरी शाह, नईम शाह, आकाश शाह आदि रहे।






