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ग्राम्य विकास प्रशिक्षण संस्थान में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का हो रहा आयोजन,इस महत्वपूर्ण विषय पर दी गयी जानकारी

A two-day training program is being organized in the Rural Development Training Institute, information given on this important topic.

Lucknow news today ।उत्तर प्रदेश राज्य भूगर्भ जल विभाग के सहयोग से दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान द्वारा दिनांक 22-23 फरवरी की अवधि में, “डेवलपिंग कन्वर्जेन्स-बेस्ड ऐक्शन प्लान्स फॉर सीकिंग पब्लिक इन्वेस्टमेण्ट्स(बेस्ड ऑन डब्ल्यू0एस0पी0)” विषयक दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।


उक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र के अवसर पर, मुख्य अतिथि डॉ0 बलकार सिंह, सचिव नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग तथा निदेशक एस पी एम यू राजा मोहन, चीफ कंजरवेटर फॉरेस्ट, राजेश कुमार प्रजापति, विशेष सचिव नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग तथा अनुपम श्रीवास्तव, नोडल ऑफिसर, भूगर्भ जल विभाग उ0प्र0 की गरिमामयी उपस्थिति में संस्थान के अपर निदेशक बी डी चौधरी द्वारा किया गया।
उक्त कार्यशाला के अन्तर्गत प्रदेश के कृषि, सिंचाई, भूगर्भ जल, उद्यान प्रौद्यौगिकी तथा गन्ना इत्यादि विभाग के सम्बन्धित अधिकारियों व सम्बन्धित संस्थाओं के कार्यकर्ताओं द्वारा प्रतिभाग किया जा रहा है।

मुख्य अतिथि डॉ बलकार सिंह ने सम्बोधन में कही यह बात

प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र समारोह के अवसर पर प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुये मुख्य अतिथि के रूप में डॉ0 बलकार सिंह ने दिनोदिन गिरते हुये भूगर्भ जल के स्तर को उद्धृत करते हुये बताया कि जल स्रोत सीमित हैं, पृथ्वी पर उपलब्ध जल का मुख्य रूप से स्रोत वर्षा जल ही हैं। वर्षा जल का अधिकतम भाग नदी नालों द्वारा समुद्र में चला जाता है, कुछ भाग वाष्पीकृत होता है एवं कुछ भाग रिस कर भूमि के अन्दर चला जाता है। भूमि के अन्दर उपस्थित व स्थिर जल को ही भूगर्भ जल(भूजल) कहा जाता है, जो मृदा एवं चट्टानों की रन्ध्रों, परतों, संधियों एवं अन्तःकरणीय स्थानों में उपस्थित रहता है। भूमि के अन्दर जहाँ सतही जल रिसकर एकत्र होता है, जिसे जल भरा पाताली पानी कहते हैं। इन्हीं जलभरों में उपलब्ध जल का उपयोग विभिन्न उद्देश्यों जैसे पेयजल, सिंचाई एवं उद्योगों आदि के लिये किया जाता है। डॉ0 बलकार सिंह ने पुनः प्रतिभागियों को बताया कि शहरों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल एवं घरेलू उपयोग हेतु लगभग पूर्णरूपेण निर्भरता जलभरों से प्राप्त भूमि जल पर ही है। जनसंख्या वृद्धि, कृषि, तीव्र शहरीकरण एवं औद्योगिकरण के कारण भूजल के अत्यधिक दोहन से इन जलभरों पर अत्यधिक दबाव पड रहा है, जिससे जल स्तर में निरन्तर गिरावट आ रही है।

अपर निदेशक बी डी चौधरी ने कही यह बात

उद्घाटन सत्र समारोह के अवसर पर अध्यक्षीय सम्बोधन के दृष्टिगत संस्थान के अपर निदेशक बी0डी0 चौधरी ने प्रतिभागी अधिकारियों को सम्बोधित करते हुये बताया कि उ0प्र0 मे भूगर्भ जल विभाग द्वारा अटल भूजल के नाम से महत्वाकांक्षी योजना संचालित की जा रही है। अटल भूजल योजना उ0प्र0 के दस जिलों 26 विकास खण्डो व 550 ग्राम पंचायतों में चल रही है, जिसमें बुन्देलखण्ड क्षेत्र के 6 जिले- बाँदा, हमीरपुर, चित्रकूट, महोबा, झाँसी व ललितपुर तथा पश्चिमी उ0प्र0 के 4 जिले यथा- मेरठ, मुज्ज्फरनगर, शामली व बागपत सम्मिलित है। इस योजना के अन्तर्गत भूजल स्तर के गिरावट के कारणों को चिन्हित कर संस्थागत संस्थानों का सशक्तिकरण एवं क्षमता विकास तथा सतत् भूजल प्रबंधन द्वारा सुरक्षा नियोजन की तैयारी के साथ-साथ समउद्देशीय योजनाओं के अभिसरण (कन्वर्जेन्स) व जनसहभागिता सहयोग से भूजल स्तर बढाने की प्रक्रियाओं से पडने वाले प्रभाव को अपनाया जा रहा है।
उक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम के अन्तर्गत यथा महत्वपूर्ण विषयों- अटल भूजल योजना की अद्यतन स्थिति तथा राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय परिप्रेक्ष्य में उम्मीदें तथा जमीनी हकीकत व आंकलन, अटल भूजल योजना की निरन्तरता, उपलब्धियां तथा अन्य मुख्य विषयों पर अध्ययन, परस्पेक्टिव ऑफ कन्वर्जेन्स थू्र द लेंथ एण्ड लाइन डिपार्टमेंट्स- हाइलाइट्स एण्ड चैलेंजेस इत्यादि पर वार्ता प्रदान करने हेतु राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय प्रबुद्ध विषय विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी वार्तायें प्रदान की जा रही हैं।

इनका रहा सराहनीय योगदान

प्रशिक्षण कार्यक्रम के आयोजन में कार्यक्रम नियंत्रक डॉ0 अशोक कुमार, संजय कुमार सहायक निदेशक, विषय विशेषज्ञ- यू0पी0 सिंह तथा संकाय सदस्य धर्मेन्द्र कुमार का सराहनीय योगदान है।

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