
Lucknow University news today । लखनऊ विश्वविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग द्वारा बुधवार को विभागीय परिसर में ‘जिज्ञासा यज्ञ’ कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। दोपहर 2:30 बजे आयोजित कार्यक्रम का मूल मंत्र “जिज्ञासा जगाएँ • प्रश्न पूछें • प्रश्नों को शोध तक पहुँचाएँ” रहा। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में निर्भीक होकर प्रश्न पूछने, जिज्ञासा को प्रोत्साहित करने तथा उसे शोध एवं नवाचार से जोड़ने की संस्कृति विकसित करना था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संकायाध्यक्ष प्रो. श्रवण कुमार ने की। उन्होंने कहा, “प्रश्नशीलता ही ज्ञान-विस्तार की पहली सीढ़ी है।” उन्होंने विद्यार्थियों को जिज्ञासु दृष्टिकोण विकसित करने तथा प्रश्नों के माध्यम से ज्ञान के नए आयामों की खोज करने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर विभाग की समन्वयक प्रो. अपर्णा गोडबोले ने कहा, “हर खोज की शुरुआत एक प्रश्न से होती है।” उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी जिज्ञासाओं को शोध एवं नवाचार की दिशा में आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने जिज्ञासा और शोध संस्कृति को बताया महत्वपूर्ण
चीफ प्रोवोस्ट प्रो. आशीष अवस्थी ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा, “जिज्ञासु विद्यार्थी ही नए विचारों के वाहक बनते हैं।” उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में प्रश्न करने की स्वतंत्रता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना उच्च शिक्षा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
अतिरिक्त प्रोवोस्ट प्रो. महेन्द्र अग्निहोत्री ने कहा, “प्रश्नों को प्रोत्साहन मिले, तभी नवाचार आगे बढ़ेगा।” उन्होंने विद्यार्थियों को अपने प्रश्नों को सीखने और शोध की प्रक्रिया से जोड़ने के लिए प्रेरित किया।
चीफ प्रॉक्टर प्रो. राकेश द्विवेदी ने कहा, “निर्भीक प्रश्न, सशक्त विद्यार्थी की पहचान हैं।” उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासन एवं तार्किकता के साथ अपनी जिज्ञासाओं को अभिव्यक्त करने का आह्वान किया।
छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष प्रो. अमिता कन्नौजिया ने कहा, “जिज्ञासा विद्यार्थियों के व्यक्तित्व-विकास की शक्ति है।” उन्होंने ऐसे कार्यक्रमों को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए उपयोगी बताया।
डॉ. हेमेन्द्र कुमार सिंह ने जिज्ञासा को शोध से जोड़ने का दिया संदेश
कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. सुमित गंगवार एवं डॉ. हेमेन्द्र कुमार सिंह ने जिज्ञासा से शोध तक की यात्रा को समझाया। डॉ. हेमेन्द्र कुमार सिंह ने कहा, “जिज्ञासा को शोध की दिशा दें।” उन्होंने विद्यार्थियों से अपने प्रश्नों को अन्वेषण, प्रमाण और शोध के माध्यम से नए ज्ञान में परिवर्तित करने का आह्वान किया।
उन्होंने “जिज्ञासा → प्रश्न → अन्वेषण → प्रमाण → ज्ञान → शोध → नवाचार” की यात्रा को रेखांकित करते हुए कहा, “हर प्रश्न में शोध की संभावना है।”
डॉ. सुमित गंगवार ने कहा कि विद्यार्थियों के प्रश्नों को प्रोत्साहित करना शोध-उन्मुख एवं नवाचारपरक शैक्षिक वातावरण के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता
कार्यक्रम को सफल बनाने में शिक्षाशास्त्र विभाग के सभी शिक्षकगण—प्रो. तृप्ता त्रिवेदी, प्रो. दिनेश कुमार, प्रो. अपर्णा गोडबोले, प्रो. मुनेश कुमार, प्रो. किरण लता डंगवाल, डॉ. नीतू सिंह, डॉ. सूर्य नारायण गुप्ता, डॉ. देवेंद्र कुमार यादव, डॉ. सुमित गंगवार, डॉ. संजय सिंह यादव एवं डॉ. पूनम श्रीवास्तव—ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
डॉ. पूनम श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों के साथ सक्रिय संवाद स्थापित करते हुए उनकी जिज्ञासाओं एवं प्रश्नों को शोधपरक दृष्टिकोण से देखने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में विभाग के समस्त शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण “जिज्ञासा की शक्ति” विषय पर आधारित नुक्कड़ नाटक रहा, जिसके माध्यम से संदेश दिया गया कि “प्रश्न कमजोरी नहीं, सीखने की शक्ति हैं।”
कार्यक्रम का समापन “प्रश्न ही प्रगति की पहली सीढ़ी है” तथा “जिज्ञासा की ज्योति प्रज्वलित करें” के संकल्प के साथ हुआ।




