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रामकथा के छठवें दिन कथा वाचक ने सुनाई ये सुंदर कथा,,,

Jalaun news today । जालौन क्षेत्र के उदोतपुरा गांव में आयोजित रामकथा के छठे दिन कथा वाचक ने भरत मिलाप की कथा का वर्णन किया। भरत मिलाप की कथा सुनकर श्रोता भाव विभोर हो उठे।
उदोतपुरा स्थित लक्ष्मनजू मंदिर परिसर में रामकथा के छठे दिन कथा वाचक पंडित संजय पांडेय ने बताया कि केवट, राम-लक्ष्मण और सीता माता को गंगा पार लेकर गए। केवट को निर्मल भक्ति का वरदान देकर प्रभु श्रीराम ने गंगा किनारे पहुंचकर गंगा मैया की पूजा अर्चना की। उसके बाद प्रभु श्रीराम प्रयागराज पहुंचे और ऋषि भारद्वाज से भेंट की। एक रात ऋषि भारद्वाज के आश्रम में विश्राम करने के उपरांत अगले दिन प्रातः काल आगे बढ़े और महर्षि बाल्मीकि के आश्रम में पहुंचने पर ऋषियों ने प्रभु की सुंदर स्तुति गाई। उसके बाद प्रभु श्रीराम ने महर्षि बाल्मीकि से स्थान पूछकर चित्रकूट में निवास किया। दूसरी तरफ सुमंत वापस अयोध्या पहुंचे और राजा दशरथ ने जब सुना कि राम वापस नहीं आए, तो दशरथ ने राम के वियोग में प्राण त्याग दिए। उधर भरत अपने ननिहाल से वापस आए और पिता का अंतिम संस्कार किया गया। उसके बाद बैठी राजसभा में भरत जी ने निर्णय लिया कि वन में जाकर श्रीराम को राजसत्ता सौंप दी जाए, फिर भरत जी सभी माताओं और अयोध्या वासियों को साथ लेकर चित्रकूट में पधारे और रामजी से भेंट हुई। भरत जी ने प्रभु श्री राम से राजगद्दी संभालने का आग्रह किया। जिस पर श्रीराम ने राजसत्ता अस्वीकार कर दी और श्रीराम ने भरत को अपनी चरणपादुका दीं। भरत चरणपादुका साथ लेकर वापस अवधपुरी आए और रामजी की चरण पादुकाओं से आज्ञा लेकर राजसत्ता का कार्य संभाला था। इस मौके पर पारीक्षित नैपाल सिह, रामश्री, बुद्धसिंह हवलदार, गजेंद्र सिंह, राकेश पचौरी, राधेसिंह, राजू चौहान, गिरजा शंकर, डाक्टर भज्जू, पिंटू, पागलदासघ् महाराज, शंकरिया चौहान, शीलू, नरेंद्र सिंह चौहान, सुमित, बलराम सिंह, शंकरसिंह चौहान, दीपेश सिंह, आशुतोष चौहान, देवसिंह चौहान, मंगल सिंह, छोटे सिंह चौहान, विजय सिंह, करन सिंह, सावित्री देवी, जानकी देवी, जय देवी, रोशनी देवी, मालती देवी आदि मौजूद रहे।

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