रिपोर्ट बबलू सेंगर
Jalaun news today । जालौन क्षेत्र में पंचायत चुनाव को लेकर हाईकोर्ट के तीन माह में चुनाव कराने के आदेश के बाद गांवों में राजनीतिक हलचल तेज होने लगी है। प्रधान पद के संभावित दावेदारों ने अभी से अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। गांवों में लोगों से मेलजोल बढ़ाने के साथ ही सोशल मीडिया पर भी सक्रियता बढ़ाई जा रही है। संभावित प्रत्याशी लोगों के बीच पहुंचकर संपर्क साध रहे हैं, तो वहीं चरण वंदन कर भी अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। चुनाव की तारीखों की औपचारिक घोषणा भले ही नहीं हुई हो, लेकिन गांवों में संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता से चुनावी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
पंचायत चुनाव की आहट के साथ ही गांवों में लोगों के बीच राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं होने लगी हैं। प्रधान पद के संभावित दावेदार अपने समर्थकों और परिचितों के जरिए अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। गांव में होने वाले धार्मिक आयोजनों और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में भी उनकी मौजूदगी बढ़ने लगी है। जो लोग लंबे समय से ग्रामीणों के बीच कम नजर आते थे, वे भी अब लोगों से मिलने-जुलने और उनका हालचाल जानने में जुट गए हैं। ग्रामीण अशोक, रामकेश, विशाल और रामहेत आदि ने बताया कि चुनाव नजदीक आने की चर्चाओं के बीच संभावित दावेदारों के व्यवहार में भी बदलाव दिखाई देने लगा है। पहले जहां रास्ते में मुलाकात होने पर नमस्कार या हाथ जोड़कर अभिवादन करने तक बात सीमित रहती थी, वहीं अब अरे भइया, चाचा, कक्का और ताऊ कहकर अपनापन जताया जा रहा है। बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लेने का सिलसिला भी बढ़ने लगा है। लोगों से बातचीत के दौरान उनकी समस्याएं पूछी जा रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि संभावित दावेदार केवल अपने परिचितों से ही नहीं मिल रहे, बल्कि मित्रों और रिश्तेदारों के माध्यम से भी दूसरे परिवारों तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। जिन लोगों से पहले बातचीत कम होती थी, उनसे भी संबंध सुधारने की कोशिश की जा रही है।
गांव में किसका प्रभाव कितना है, किस परिवार के कितने मतदाता हैं और कौन किसके समर्थन में रह सकता है, इस तरह की चर्चाएं भी धीरे-धीरे जोर पकड़ने लगी हैं। ंभावित प्रत्याशी अपनी गतिविधियों, सामाजिक कार्यक्रमों में सहभागिता और जनसंपर्क से जुड़ी तस्वीरें साझा कर रहे हैं। उनके समर्थक भी पोस्ट और संदेशों के माध्यम से उनकी सक्रियता को लोगों तक पहुंचा रहे हैं। हालांकि, पंचायत चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया और कार्यक्रम को लेकर अभी कोई घोषणा नहीं हुई है, लेकिन संभावित दावेदारों ने अपने पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास शुरू कर दिया है। आने वाले समय में चुनावी गतिविधियां और बढ़ने की संभावना है। फिलहाल गांवों में मेल-मिलाप, बदलते संबोधन और सोशल मीडिया पर बढ़ती सक्रियता ने पंचायत चुनाव को लेकर ग्रामीण राजनीति में सरगर्मी बढ़ा दी है।






