(रिपोर्ट – बबलू सेंगर)

Jalaun news today । जिसके अंदर के दानव जीत गया उसका जीवन दुखी, परेशान और कष्ट कठिनाइयों से भरा होगा और जिसके अंदर के देवता जीत गया उसका जीवन सुखी, संतुष्ट और भगवत प्रेम से भरा हुआ होगा। यह बात शनिधाम पर आयोजित भागवत कथा के तीसरे दिन भागवताचार्य वैष्णवी किशोरी ने उपस्थित भगवद् प्रेमियों के समक्ष कही।
नगर के शनि धाम मंदिर पर आयोजित सप्ताहिक श्रीमद्भगवद् ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन भगवताचार्य वैष्णवी किशोरी श्रीधाम वृदावन ने उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि यह संसार भगवान का एक सुंदर बगीचा है। यहां चौरासी लाख योनियों के रूप में भिन्न, भिन्न प्रकार के फूल खिले हुए हैं। जब-जब कोई अपने गलत कर्माे द्वारा इस संसार रूपी भगवान के बगीचे को नुकसान पहुंचाने की चेष्टा करता है तब-तब भगवान इस धरा धाम पर अवतार लेकर सजनों का उद्धार और दुर्जनों का संहार किया करते हैं। इसलिए हमेशा अपने विचारों पर पैनी नजर रखते हुए बुरे विचारों को अच्छे विचारों से जीतते हुए अपने मानव जीवन को सुखमय एवं आनंद मय बनाना चाहिए। जब तक जीव माता के गर्भ में रहता है तब तक वह बाहर निकलने के लिये छटपटाता रहता है। उस समय वह जीव बाहर निकलने के लिये ईश्वर से अनेक प्रकार के वादे करता है। मगर जन्म लेने के पश्चात सांसारिक मोह माया में फंस कर वह भगवान से किए गए वादों को भूल जाता है। जिसके परिणामस्वरूप उसे चौरासी लाख योनी भोगनी पड़ती है। कहा कि व्यक्ति अपने जीवन में जिस प्रकार के कर्म करता है उसी के अनुरूप उसे मृत्यु मिलती है। भक्त ध्रुव के सत्कर्मों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि ध्रुव की साधना, उनके सत्कर्म और ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा के परिणाम स्वरूप ही उन्हें वैकुंठ लोक प्राप्त हुआ। कथा श्रवण कर रहे श्रद्धालुओं में पारीक्षित विमला देवी, पुजारी रामकिशोर गोसाई, अनुराग शर्मा, बृजेश महाराज, मानवेंद्र परिहार, अनुराग तिवारी, राजा भइया, चंद्रभान मिश्रा, विमला, आरती, महिमा, प्रतिज्ञा, प्रीति, वंदना आदि मौजूद रहे।





