सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने किया भाजपा सरकार पर करारा प्रहार,, कही यह बड़ी बात

SP President Akhilesh Yadav made a strong attack on the BJP government, said this big thing

UP news today।समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रविवार को भाजपा सरकार पर करारा प्रहार किया है। उन्होने कहा कि भाजपा को किसानों के सुख-दुःख से कोई मतलब नहीं है। भाजपा सिर्फ सत्ता पर काबिज होने के लिए षड्यंत्र और साजिशें करती है। बेमौसम बरसात से प्रदेश का किसान त्राहि-त्राहि कर रहा है पर मुख्यमंत्री जी और उनकी सरकार चुनावी हेराफेरी और चुनावी गणित बैठाने में दिल्ली-लखनऊ एक किए हुए हैं।
उन्होने कहा कि चिंता की बात है कि इन दिनों हुई बरसात से और कहीं-कहीं ओलावृष्टि से गेहूं, चना, सरसों की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। टमाटर, आलू, शिमला मिर्च, बींस, गोभी, बैगन की फसल भी प्रभावित हुई है। आम में बौर आने शुरू हो गए थे बारिश में ये न केवल गिर गए हैं अपितु उसमें खर्रा रोग और भुनगे भी लगने लगे हैं। आम बागान के किसान तबाही के कगार पर पहुंच गए हैं। सच तो यह है कि भाजपा सरकार में किसान और खेती दोनों उपेक्षित हैं। भाजपा ने 2022 के विधान सभा चुनाव में अपने संकल्प पत्र में किसानों से सम्बन्धित जो वायदे किए थे, उसमें एक भी वादा पूरा नहीं किया है। न किसान के कर्ज माफ हुए और न ही किसानों की आय दुगुनी करने की दिशा में कोई कदम उठाया गया। सब जुमला ही रह गया है यहीं नहीं किसानों के उपयोग में आने वाले कृषि उपकरण, बीज, खाद, रसायन और बिजली-डीजल तक महंगे कर दिए गए। भाजपा ने किसानों की आय तो दुगुनी नहीं की पर लागत की बढ़ोत्तरी और ओलावृष्टि की डबल मार झेल रहे किसानों को डबल इंजन वाली भाजपा सरकार को दुगुना मुआवजा तो देना ही चाहिए। किसानों की मुआवजे की डबल मांग पूरी तरह जायज है।
श्री यादव ने कहा कि किसान महंगाई और भ्रष्टाचार की मार झेल रहा है जबकि भाजपा सरकार ने उद्योगपतियों का 15 लाख करोड़ रूपये का बैंक कर्ज माफ कर दिया है। बैंको से बड़े-बड़े कर्ज लेकर जो उद्योगपति विदेश भाग गए थे, उनको भारत लाने के बजाय, उन्हीं कर्जदार उद्योगपतियों को फिर से कर्ज देने के निर्णय से भाजपा सरकार का असली चेहरा और चरित्र सामने आ चुका है।
हद तो यह है कि भाजपा सरकार ने पूर्व में भी प्राकृतिक आपदा के शिकार किसानों को मुआवजा नहीं दिया, उनकी फसल को क्षति का सर्वे करने के नाम पर मदद की फाइलें ही जमींदोज हो गई। इस संवेदनशून्य भाजपा सरकार से क्या उम्मीद की जाए कि वह बारिश और ओलावृष्टि से क्षतिग्रस्त खेती का तत्काल सर्वे कर मुआवजा देगी?
उन्होने कहा कि समाजवादी सरकार में जहां किसान को मुफ्त सिंचाई के साथ सस्ती बिजली दी गई थी वहीं किसानों की मदद और खेती की समृद्धि के लिए बजट का 75 प्रतिशत धनराशि गांवों के लिए रखी गई थी। किसानों के कर्जमाफ किए थे। भाजपा सत्ता में आई तो उसने समाजवादी सरकार की सभी किसान हितैषी योजनाओं को ठण्डे बस्ते में डाल दिया है और किसानों के उत्पीड़न के कानून बनाने शुरू कर दिए है। किसान आज आक्रोशित और आंदोलित है। तीन काले कृषि कानूनों की वापसी भाजपा सरकार ने मजबूरी में की थी लेकिन अब एमएसपी देने में आना-कानी कर रही है। किसान इस शोषणकारी सरकार को अब और सहन नहीं करेंगे। किसान की राह में कील कांटे बिछाने वाली भाजपा सरकार को किसान ही करारा जवाब देंगे और भाजपा को सत्ता से बाहर करके ही चैन लेंगे।

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