शनिधाम में चल रही रामकथा में कथाचार्य ने सुनाया ये मार्मिक प्रसंग,,,

रिपोर्ट बबलू सेंगर

Jalaun news today । जालौन के शनिधाम मंदिर में 11 दिवसीय रामकथा के आठवें दिन लंका प्रस्थान और विभीषण शरणागति का मार्मिक प्रसंग कथा वाचक गुरूप्रसाद ने भक्तों को सुनाया। जिसे सुनकर स्रोतागणों की आंखें नम हो गईं।
गूढ़ा न्यामतपुर स्थित शनिधाम मंदिर में आयोजित 11 दिवसीय श्रीराम कथा के आठवें दिन का आयोजन भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ। कथा वाचक गुरु प्रसाद ने भगवान श्रीराम के लंका प्रस्थान, समुद्र पर सेतु निर्माण और रावण के भाई विभीषण की शरणागति का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब भगवान श्रीराम समुद्र तट पर पहुंचे, तो उन्होंने तीन दिन तक समुद्र से प्रार्थना की कि वह मार्ग दे, लेकिन समुद्र ने कोई उत्तर नहीं दिया। तब भगवान राम ने कहा विनय न मानत जलधि जड़, गए तीन दिन बीति। बोले राम सकोप तब, भय बिनु होइ न प्रीति।। श्रीराम ने क्रोधित होकर धनुष उठाया, तब समुद्र देवता भयभीत होकर प्रकट हुए और श्रीराम से क्षमा मांगते हुए सेतु निर्माण का मार्ग बताया। इस प्रसंग से कथा वाचक ने संदेश दिया कि विनम्रता और धैर्य आवश्यक हैं, लेकिन जब बात धर्म की रक्षा की हो, तो उचित उपाय अपनाने चाहिए। इसके बाद वानर सेना के सहयोग से नल-नील के नेतृत्व में पत्थरों पर राम नाम लिखकर समुद्र पर सेतु बनाया गया, जिससे पूरी सेना लंका की ओर बढ़ सकी। आगे कहा कि रावण का भाई विभीषण जब उसके अन्यायपूर्ण आचरण से दुखी होकर श्रीराम की शरण में आया, तो कुछ लोगों ने उसे शत्रु पक्ष का व्यक्ति मानकर स्वीकार न करने की सलाह दी। लेकिन श्रीराम ने कहा कि जो भी शरण में आए, उसे आश्रय देना ही धर्म है। भगवान राम ने विभीषण को गले लगाकर लंका का भावी राजा घोषित किया। कथा के इस प्रसंग पर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। इस मौके पर पुजारी बृजेश तिवारी, आनंद, विजय, रामकेश, राजेंद्र, बृजेंद्र, बृजेश, आशीष, प्रेमलता, भावना, आराधना आदि मौजूद रहे।

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