रिपोर्ट बबलू सेंगर

Jalaun news today । व्यक्ति का बचपन कच्चे मिट्टी की तरह होता है उसे जैसा चाहे वैसा पात्र बनाया जा सकता है। पाप के बाद कोई व्यक्ति नरकगामी हो, इसके लिए श्रीमद् भागवत में श्रेष्ठ उपाय प्रायश्चित बताया गया है। यह बात सिकरीराजा गांव में अमर सिंह भदौरिया के आवास पर आयोजित साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास गगन द्विवेदी महाराज ने कही।
दूसरे दिन कथा व्यास गगन द्विवेदी महाराज ने श्रोताओं को बताया कि राजा उत्तानपाद के वंश में ध्रुव हुए हैं। ध्रुव की सौतेली मां सुरुचि के द्वारा अपमानित होने पर भी उनकी मां सुनीति ने धैर्य नहीं खोया। जिससे एक बड़ा संकट टल गया। भक्ति को बचपन में ही करने की प्रेरणा देनी चाहिए। परिवार को बचाए रखने के लिए धैर्य संयम की नितांत आवश्यकता रहती है। भगवान नृसिंह रुप में लोहे के खंभे को फाड़कर प्रगट होना बताता है कि प्रह्लाद को विश्वास था कि भगवान इस लोहे के खंभे में भी हैं और उस विश्वास को पूर्ण करने के लिए भगवान उसी में से प्रकट हुए व हिरण्यकश्यप का वध करके भक्त प्रह्लाद के प्राणों की रक्षा की। इस मौके पर पारीक्षित चंदन कुंवर, अमर सिंह भदौरिया, अर्चना, सुनीता, शशी, विनीता, मीना, विनीता, गिरेन्द्र सिंह, मोनू, गुड्डू, राजू, जीतू, पवन, दीपक, मोंटी, विक्की, सतेंद्र सिंह, गौरव, सौरव आदि रहे।











