जालौन में आयोजित हुआ कवि सम्मेलन,, कवियों ने सुनाई सुंदर कविता

रिपोर्ट बबलू सेंगर

Jalaun news today । ‘प्रीत की रीत आकर निभा जाओ तुम, मैं बनूं इक गजल गुनगुना जाओ तुम’ इन पंक्तियों को एलआईसी के तत्वावधान में ब्लॉक परिसर में आयोजित कवि सम्मेलन में कवियत्री प्रिया श्रीवास्तव दिव्यम् ने पढ़ा। जिसे सुनकर श्रोता झूमने को मजबूर हुए।
एलआईसी व केडीआईईए (कानपुर डिवीजन एम्प्लाइज, ऐसोशिएशन यूनिट) के सहयोग से रविवार को ब्लॉक परिसर में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवि सम्मेलन का आगाज मां वीणा वादिनी की वंदना के साथ हुुआ। इसके बाद कानुपर से आए कवि कुमार सूरज ने पढ़ा ‘चंादनी रात है सितारे लिए, तट नदी के खड़े हैं किनारे लिए, सब सलामत रहें दुआ कीजिए हम तुम्हारे लिए तुम हमारे लिए।’ इस गीत को सुनकर श्रोताओ को पुरानी यादें ताजा हो गईं। विपिन मलिहाबादी के ‘जिंदगी जीना है तो इंसान होना सीखे, सब कुछ समझकर भी नादान होना सीखो’ सुनकर श्रोता भावविभोर हो गए। प्रिया श्रीवास्तव दिव्यम् के गीत ‘प्रीत की रीत आकर निभा जाओ तुम, मैं बनूं इक गजल गुनगुना जाओ तुम, जिंदगी धूप सी रात कांटों भरी, छांव बनकर के जीवन में आ जाओ तुम’ को सुनकर श्रोता झूम उठे। पवन सबरस के गीत ‘मैं खड़ार हूं डगर पर सफर के लिए, साथ कोई नहीं हमसफर के लिए, जिंदगी में नहीं शेष कुछ भी रहा, सिर्फ आंसू बचे हैं नजर के लिए’ को सुनकर श्रोताओं की आंखें नम हो गईं। जितेंद्र लल्ला ने पढ़ा ‘चंदन है पानी है और क्या, दुनियां कहानी है और क्या। शाहिद महक ने ‘डर मुझे भी लगा फासला देखकर, पर मैं बढ़ता गया रास्ता देखकर’ पढ़कर महफिल लूट ली। शिवराम शांति आगरा ने जब राजनीति को लेकर ‘सियायत जहर ये घोले इसे सब जन पिएं कैसे, करें गंभीर घावों को बताओ ये सिएं कैसे’ पढ़ा तो उपस्थितजन हाथ खोलकर ताली बजाने को मजबूर हो गए। कार्यक्रम का संचालन करते हुए कानुपर से आए कवि मुकेश श्रीवास्तव ने ‘जब झुक के करे सैल्यूट हिमालय सागर दहराए, तिरंगा लहर, लहर लहराए’ पढ़ा तो श्रोता वीर रस से सराबोर नजर आए। इस मौके पर शाखा प्रबंधक आरएन गौतम, महेंद्र पाटकार मृदुल, सुशील कुशवाहा, अफसार अहमद खान, पवन प्रताप आदि मौजूद रहे।