रिपोर्ट बबलू सेंगर

Jalaun news today । जालौन में छह मोहर्रम-उल-हराम के मुक़द्दस मौके पर नगर के ऐतिहासिक तकिया मैदान में धार्मिक जलसे का आयोजन किया गया। जलसे में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश किया। कार्यक्रम में इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत को याद करते हुए उनके बताए रास्ते पर चलने का संदेश दिया गया।
जलसे में मुख्य वक्ता हज़रत क़ारी इकरामउद्दीन साहब ने कर्बला के वाकये को याद करते हुए कहा कि इमाम हुसैन की शहादत केवल एक धार्मिक घटना नहीं, बल्कि इंसानियत, न्याय, सच्चाई और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक है। कर्बला का पैगाम हमें हर हाल में हक और सच्चाई का साथ देने की सीख देता है। इमाम हुसैन ने अपने परिवार और साथियों के साथ शहादत स्वीकार कर ली, लेकिन अन्याय और जुल्म के सामने झुकना स्वीकार नहीं किया। उनकी कुर्बानी पूरी मानवता के लिए एक मिसाल है, जो आज भी लोगों को सत्य और इंसाफ के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। उन्होंने मशहूर शेर पढ़ते हुए कहा कि कत्ले हुसैन असल में मर्ग-ए-यज़ीद है, इस्लाम ज़िंदा होता है हर कर्बला के बाद। शहर काजी मौलाना साबिर ने कहा कि मोहर्रम का महीना त्याग, बलिदान, सब्र और ईमानदारी का संदेश देता है। कर्बला की घटना हमें यह सिखाती है कि संख्या नहीं, बल्कि सच्चाई और ईमान की ताकत सबसे बड़ी होती है। यह महीना आत्ममंथन और इंसानियत की सेवा का संदेश देता है। इमाम हुसैन की कुर्बानी सदियों बाद भी लोगों के दिलों में जिंदा है और हमेशा इंसाफ तथा सत्य की राह दिखाती रहेगी। जलसे में बड़ी सुन्नी जामा मस्जिद के इमाम मुफ़्ती अज़हर हुसैन चिश्ती, मौलाना आबिद शफ़ीक़ शाह, मास्टर अफ़रोज़ शाह आदि रहे। अंत में मुल्क की खुशहाली, अमन-चैन, तरक्की और आपसी भाईचारे के लिए विशेष दुआ कराई गई।







