जालौन के बीएसएनएल फ्रेंचाइजी संचालक को मिली हाइकोर्ट से राहत,,यह है मामला,जिसमें थे आरोपी

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रिपोर्ट बबलू सेंगर

Jalaun news today । जालौन जनपद के कालपी कोतवाली में दर्ज करीब 1.10 करोड़ रुपये की कथित जमीन धोखाधड़ी के मामले में बीएसएनएल फ्रैंचाइजी संचालक धर्मेंद्र सक्सेना को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को निरस्त करते हुए 22 जनवरी 2026 को पारित संज्ञान आदेश भी उनके संबंध में रद्द कर दिया।

यह मामला कालपी कोतवाली में दर्ज अपराध संख्या 303/2023 से संबंधित है। इसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

1.10 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप

प्राथमिकी में छह नामजद और सात अज्ञात लोगों के खिलाफ आरोप लगाए गए थे। आरोप था कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर और किसी अन्य व्यक्ति के स्थान पर विक्रयावती का प्रतिरूपण करते हुए करीब 1.10 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई। विवेचना के दौरान पुलिस की ओर से कई आरोपपत्र दाखिल किए गए। 21 जनवरी 2026 को दाखिल पांचवीं पूरक चार्जशीट में धर्मेंद्र सक्सेना समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था। इसके अगले दिन न्यायालय ने मामले में संज्ञान लिया था।

याचिका में दी गईं दलीलें

धर्मेंद्र सक्सेना की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया कि कथित फर्जी दस्तावेज तैयार करने अथवा धोखाधड़ी में उनकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी। याचिका में यह भी दलील दी गई कि उन्हें मुख्य रूप से बीएसएनएल फ्रैंचाइजी संचालक होने के आधार पर मामले में आरोपी बनाया गया। उनके अनुसार, फर्जी दस्तावेज तैयार करने से संबंधित आरोप उस अधिकृत ऑपरेटर पर था, जिसे उन्होंने बीएसएनएल के आउटसोर्सिंग कस्टमर सर्विस सेंटर में नियुक्त किया था और जिसे मामले में आरोपी बनाया गया था।

रिकॉर्ड में पर्याप्त सामग्री नहीं मिलने का उल्लेख

16 सितंबर 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की कोर्ट संख्या 79 में न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव ने मामले की सुनवाई की। रिकॉर्ड और विवेचना के दौरान एकत्र सामग्री का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने धर्मेंद्र सक्सेना को कथित फर्जी दस्तावेज तैयार करने से जोड़ने वाली पर्याप्त सामग्री नहीं पाई। आदेश में उन्हें कथित धोखाधड़ी या षड्यंत्र से जोड़ने वाली पर्याप्त सामग्री उपलब्ध नहीं होने का उल्लेख किया गया।

कार्यवाही और संज्ञान आदेश निरस्त

न्यायालय ने इन परिस्थितियों में केस संख्या 37/2026, State vs. Dharmendra Saxena and Others में धर्मेंद्र सक्सेना के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही निरस्त कर दी। साथ ही 22 जनवरी 2026 को पारित संज्ञान आदेश को भी उनके संबंध में रद्द कर दिया गया।