अपराध नियंत्रण, पारदर्शी जनसुनवाई और सीमाओं की निगरानी पर रहेगा जोर: एसपी सुरेश चंद्र रावत
मथुरा में विकसित जनसुनवाई निगरानी प्रणाली को जालौन में लागू करने का प्रयास, शिकायत पर्ची पर दर्ज होगा संबंधित अधिकारी का नाम; अंतरराज्यीय अपराध रोकने के लिए 22 स्थानों पर एएनपीआर कैमरे लगाने की तैयारी
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रिपोर्ट आशुतोष शर्मा
Orai / Jalaun news today । जनपद जालौन के नवागंतुक पुलिस अधीक्षक सुरेश चंद्र रावत ने अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप अपराध नियंत्रण, प्रभावी जनसुनवाई, पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनपद की पुलिस रैंकिंग को बनाए रखने के साथ-साथ कानून-व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। आम नागरिकों की शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए जनसुनवाई व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में भी प्रयास किया जाएगा।
पुलिस अधीक्षक ने कहा कि थाने से लेकर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तक अपनी समस्या लेकर पहुंचने वाले फरियादियों को यह जानकारी होनी चाहिए कि उनकी शिकायत किस अधिकारी के पास है और उस पर क्या कार्रवाई की जा रही है। इसके लिए वह जनपद में एक ऐसी निगरानी प्रणाली विकसित करने का प्रयास करेंगे, जिसके माध्यम से शिकायतों की स्थिति पर नजर रखी जा सके।
1997 बैच के पीपीएस अधिकारी हैं सुरेश चंद्र रावत
नवागंतुक पुलिस अधीक्षक सुरेश चंद्र रावत वर्ष 1997 बैच के अधिकारी हैं। मूल रूप से सीतापुर के निवासी रावत ने अर्थशास्त्र में परास्नातक तक की शिक्षा प्राप्त की है। इस वर्ष पदोन्नति प्राप्त करने के बाद पुलिस अधीक्षक के रूप में जालौन उनका पहला जनपद बताया गया है।
अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने अलीगढ़ और अयोध्या जैसे जनपदों में पुलिस उपाधीक्षक के रूप में जिम्मेदारियां निभाईं। वर्ष 2016 में पदोन्नति के बाद उन्होंने अपर पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्य किया। इस दौरान वह पुलिस अधीक्षक यातायात, वाराणसी तथा पुलिस अधीक्षक नगर, लखनऊ जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी तैनात रहे। इन पदों पर कार्य करने के कारण उन्हें यातायात प्रबंधन, शहरी पुलिस व्यवस्था और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में काम करने का अनुभव प्राप्त हुआ। जालौन आने से पहले वह मथुरा में पुलिस अधीक्षक ग्रामीण के पद पर कार्यरत थे।
जनसुनवाई में शिकायतकर्ता को मिलेगी स्पष्ट जानकारी
पुलिस अधीक्षक ने जनसुनवाई व्यवस्था में सुधार को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करते हुए मथुरा में किए गए प्रयोग का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि मथुरा में उनके कार्यकाल के दौरान एक सॉफ्टवेयर विकसित किया गया था, जिसके माध्यम से केंद्रीय निगरानी प्रणाली के तहत यह जानकारी प्राप्त की जा सकती थी कि किसी व्यक्ति ने अपनी शिकायत के संबंध में कितनी बार और किन-किन स्थानों पर प्रार्थना पत्र दिया है। साथ ही, शिकायत की जांच किस अधिकारी को सौंपी गई है, इसकी जानकारी भी उपलब्ध हो जाती थी।

उन्होंने कहा कि जालौन में भी इसी तरह की व्यवस्था विकसित करने का प्रयास किया जाएगा। वर्तमान में जनसुनवाई के दौरान फरियादियों को भरोसा पर्ची दी जाती है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत शिकायतकर्ता को ऐसी पर्ची देने पर विचार किया जाएगा, जिस पर संबंधित अधिकारी का नाम भी अंकित हो। इससे शिकायतकर्ता को यह पता रहेगा कि उसकी समस्या की जांच किस अधिकारी के स्तर पर लंबित है।
एसपी के अनुसार, जब कोई फरियादी अपनी शिकायत लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचेगा, तो शिकायत के पूर्ववर्ती विवरण के आधार पर यह जानकारी प्राप्त करना आसान होगा कि वह पहले संबंधित थाने गया था या नहीं, उसने कहां-कहां प्रार्थना पत्र दिए और अब तक क्या कार्रवाई हुई। इस प्रकार शिकायतों के निस्तारण में जवाबदेही बढ़ाने तथा अनावश्यक रूप से फरियादियों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने से बचाने में मदद मिल सकती है।
मिशन शक्ति केंद्रों को बनाया जाएगा आदर्श
महिलाओं की सुरक्षा और उनकी समस्याओं के प्रभावी समाधान के लिए मिशन शक्ति केंद्रों को और सशक्त बनाने पर भी जोर दिया जाएगा। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि मिशन शक्ति केंद्रों को आदर्श केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा, ताकि महिलाओं को अपनी शिकायत दर्ज कराने, सहायता प्राप्त करने और पुलिस से संपर्क करने में बेहतर सुविधा मिल सके।
महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों में जागरूकता, शिकायतों पर कार्रवाई और पुलिस की उपलब्धता महत्वपूर्ण पहलू होंगे। मिशन शक्ति केंद्रों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने से महिलाओं को स्थानीय स्तर पर सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।
गांडीव और एनएएफआईएस पोर्टल की रैंकिंग में सुधार का लक्ष्य
पुलिस अधीक्षक ने पुलिस की तकनीकी कार्यप्रणाली और ऑनलाइन प्रणालियों के बेहतर उपयोग पर भी जोर दिया। उन्होंने गांडीव तथा एनएएफआईएस पोर्टल की रैंकिंग में सुधार लाने की बात कही। इन प्रणालियों का प्रभावी उपयोग पुलिस के कार्यों में तकनीकी दक्षता बढ़ाने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस की प्राथमिकता केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अपराध की रोकथाम, सूचनाओं के प्रभावी उपयोग और निगरानी व्यवस्था को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दिया जाएगा। जनपद में पहले से चल रहे प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल बढ़ाने की योजना है।
22 महत्वपूर्ण स्थान पर लगेंगे एएनपीआर कैमरे
हमारे संवाददाता आशुतोष शर्मा के सवाल पर पुलिस अधीक्षक जालौन ने बताया कि अंतरराज्यीय घटनाओं और अपराधों की रोकथाम के लिए जनपद के 22 महत्वपूर्ण स्थान चिह्नित किए गए हैं। इन स्थानों पर एएनपीआर यानी स्वचालित नंबर प्लेट पहचान प्रणाली वाले कैमरे स्थापित करने की प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है। इन कैमरों के माध्यम से गुजरने वाले वाहनों की नंबर प्लेट की पहचान करने में सहायता मिलेगी, जिससे संदिग्ध वाहनों की निगरानी और अपराध से जुड़े वाहनों का पता लगाने के प्रयासों को गति मिल सकती है।
उन्होंने बताया कि जनपद में इस दिशा में काम लगातार जारी है। इसके साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों और महत्वपूर्ण मार्गों पर सीसीटीवी कैमरों का नेटवर्क मजबूत करने की योजना है, ताकि अंतरराज्यीय सीमा से जुड़े आवागमन पर बेहतर निगरानी रखी जा सके। अपराध होने की स्थिति में कैमरों से प्राप्त फुटेज और अन्य उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर जांच में सहायता मिलने की उम्मीद है।
जालौन की भौगोलिक स्थिति और आसपास के जनपदों तथा राज्यों से जुड़े मार्गों को देखते हुए सीमावर्ती निगरानी व्यवस्था का महत्व बढ़ जाता है। ऐसे में एएनपीआर कैमरों और सीसीटीवी नेटवर्क को मजबूत करने से संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने, वाहनों की पहचान करने और घटनाओं के बाद साक्ष्य जुटाने में मदद मिल सकती है।
जवाबदेही और तकनीक के समन्वय से पुलिसिंग को प्रभावी बनाने की तैयारी
नवागत पुलिस अधीक्षक की प्राथमिकताओं में अपराध नियंत्रण के साथ जनसुनवाई की पारदर्शिता, महिला सुरक्षा, तकनीकी प्रणालियों का बेहतर उपयोग और सीमावर्ती क्षेत्रों की निगरानी शामिल हैं। मथुरा में विकसित जनसुनवाई निगरानी प्रणाली को जालौन में लागू करने का प्रयास शिकायतकर्ताओं को उनकी शिकायत की स्थिति की जानकारी देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हो सकता है।
वहीं, 22 स्थानों पर एएनपीआर कैमरे लगाने की योजना और सीसीटीवी नेटवर्क के विस्तार से अंतरराज्यीय अपराधों पर निगरानी मजबूत करने की तैयारी है।
पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि शासन की मंशा के अनुरूप अपराध नियंत्रण और जनहित को प्राथमिकता देते हुए जनपद में पुलिस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए प्रयास किए जाएंगे।





