रिपोर्ट बबलू सेंगर

Jalaun news today । जालौन के परिषदीय विद्यालयों में चल रहे ग्रीष्मकालीन शिविर में सीखने के साथ ही उनकी रचनात्मकता को भी निखारा जा रहा है। प्राथमिक विद्यालय नैनपुरा में आयोजित शिविर के तीसरे दिन बच्चों को भारतीय संस्कृति, कला और परंपरा से जोड़ते हुए भारत के प्रमुख शास्त्रीय नृत्यों एवं भारतीय चित्रकलाओं पर आधारित रोचक गतिविधियां कराई गईं।
विद्यालय की शिक्षिका रीनू पाल ने बताया कि साप्ताहिक ग्रीष्मकालीन शिविर के माध्यम से बच्चों को खेल-खेल में नई जानकारियां दी जा रही हैं, ताकि छुट्टियों के दौरान भी उनकी सीखने की प्रक्रिया जारी रहे। शिविर के तीसरे दिन बच्चों को भरतनाट्यम, कथक, कुचिपुड़ी, ओडिसी और कथकली जैसे भारत के प्रमुख शास्त्रीय नृत्यों के बारे में जानकारी दी गई। बच्चों को इन नृत्यों की विशेषताएं, पहनावा और उनकी सांस्कृतिक महत्ता भी समझाई गई। बच्चों ने समूह बनाकर नृत्य मुद्राओं की प्रस्तुति भी दी। इसके साथ ही मधुबनी, वारली, कलमकारी और पिथौरा जैसी भारतीय पारंपरिक चित्रकलाओं से भी बच्चों को परिचित कराया गया। बच्चों ने रंगों और चित्रों के माध्यम से अपनी कल्पनाओं को कागज पर उतारा। किसी ने मधुबनी शैली में चित्र बनाए तो किसी ने वारली कला के जरिए ग्रामीण जीवन को दर्शाया। बच्चों की रचनात्मकता देखकर शिक्षक भी उत्साहित नजर आए। उन्होंने बच्चों को बताया कि भारतीय कला और संस्कृति हमारी पहचान है। नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर की जानकारी होना बेहद जरूरी है। शिविर के अंत में बच्चों के कार्यों की सराहना की गई और उन्हें आगे भी इसी तरह रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया गया। शिविर में मोहन, राहुल, अखिलेश, प्रियंका, अवनी आदि ने भाग लिया।





