दीपों का पर्व दीपावली आज पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई । आम और खास हर कोई इस पर्व की तैयारियों में जुटा हुआ था तो वही इस पवित्र त्यौहार को जेलों में निरुद्ध उन बंदियों ने भी बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जो विभिन्न मामलों में जिलों में निरुद्ध हैं । उत्तर प्रदेश के अधिकांश कारागारों में बहुत ही हर्षोल्लास के साथ दीपावली को मनाया गया है । बंदियों ने जेल परिसर को दीपों से पूरी तरह ऐसे सजाया कि जैसे यह जेल नहीं बल्कि कोई आम घर हो। इसी तरह की कई जेलों की फोटो और वीडियोज यूपी के डीजी कारागार आनंद कुमार ने अपने टि्वटर हैंडल से शेयर किए।
फतेहपुर जेल के बंदियों ने सजाई आकर्षक रंगोली

यूपी के फतेहपुर जनपद की जेल में निरुद बंदियों ने कारागार परिसर में इतनी सुंदर रंगोली सजाई कि इसकी जमकर तारीफ हो रही है। तो ऐसा ही नजारा हरदोई जनपद की कारागार का सामने आया है जहां पर जेल में निरुद्ध बंदियों ने परिसर को बहुत सुंदर दीपों से जगमग किया।
अयोध्या जेल में बंद बंदियों ने सजा दी सम्पूर्ण जेल
राम की नगरी अयोध्या की जेल में बंद बंदियों ने दीपों के पर्व दीपावली के अवसर पर काफी मेहनत करते हुए पूरी जेल परिसर को दीपों की रोशनी से जगमग कर दिया।

मैनपुरी जेल में बंद महिलाओं ने अपने हाथों से बनाये बहुत सुंदर दिए
कहते हैं कि आदमी की परिस्थितियों के बदल जाने के बाद भी हुनर कभी नहीं बदलता है। यह सिद्ध कर दिया है यूपी के मैनपुरी जिले की कारागारों में बंद महिला बंदियों ने जिन्होंने ऐसे कलात्मक दिए बनाए हैं जैसे कि यह महिलाएं कोई अपराध के मामले में जेल में निरुद्ध ना होकर बल्कि किसी मृत सेल्फ में आर्ट कॉलेज से प्रशिक्षित हो
जेलों में निरुद्ध बंदियों को सुधार करने में हर संभव प्रयास कर रहे डीजी कारागार आनंद कुमार
बता दे आपको उत्तर प्रदेश के डीजी कारागार का पदभार ग्रहण करने के बाद से ही वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी आनंद कुमार यह प्रयास कर रहे हैं कि जेलों में निरुद्ध बंदियों की उस प्रतिभा को और निखारा जाए जो वह जेल में आने से पहले किया करते थे।

उन्होंने अपने पदभार ग्रहण करने के शुरुआती दौर से ही ऐसे बंधुओं को प्रशिक्षित करवाना शुरू कर दिया था जो किसी कला में पारंगत हो । अपने शुरुआती साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि कोई भी बंदी जेल में शौक से नहीं आता है निश्चित तौर पर कोई ना कोई परिस्थितियां ऐसी बन जाती है कि वह जेल पहुंच जाता है । उनका यह प्रयास है कि जब जेल में निरुद्ध बंदी बाहर निकले तो वह समाज में इज्जत का काम करके अपना व अपने परिवार का पालन पोषण कर सके।




