निषाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने सौंपा एसडीएम को ज्ञापन की ये मांग

रिपोर्ट बबलू सेंगर

Jalaun news today। निषाद पार्टी द्वारा विमुक्त जनजाति/निषाद वंश उपजातियों को अनुसूचित जाति की सूची में शमिल करने और जातिगत जनगणना में मंझवार अंकित कराने को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा है।
निषाद पार्टी के जिला सचिव अजय निषाद के नेतृत्व में कार्यकर्ता वीरेंद्र सिंह निषाद, शिव कुमार, मोहन सिंह, अजय निषाद, कीकू और बलवान सिंह आदि ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को संबोधित ज्ञापन एसडीएम राकेश कुमार सोनी को ज्ञापन सौंपकर बताया कि निषाद वंश के लोग अंग्रेजों के क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट 1871 के तहत जन्मजात अपराधी घोषित किए गए थे। भारत सरकार ने इस कानून को 31 अगस्त 1952 को निरस्त किया, जिसके बाद उन्हें विमुक्त जनजाति घोषित किया गया। इसी कारण निषाद वंश 31 अगस्त को विमुक्ति दिवस के रूप में मनाता है। बताया कि 1931 की जनगणना के अनुसार केवट, मल्लाह, निषाद, बिंद, मंझवार, कश्यप, तुरैहा, माझी, रैकवार आदि जातियां एक ही वंश की पर्यायवाची जातियां हैं। वर्तमान में एक ही वंश से जुड़ी जातियों को अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग श्रेणियों में आरक्षण दिया जा रहा है। दिल्ली में मल्लाह को अनुसूचित जाति में रखा गया है, जबकि बंगाल में केवट अनुसूचित जाति की सूची में शामिल है, वहीं उत्तर प्रदेश में निषाद वंश की इन जातियों को पिछड़ी जाति की श्रेणी में रखा गया है। इससे समाज के लोगों के साथ आरक्षण व्यवस्था में विसंगति उत्पन्न हो रही है। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि जनगणना में निषाद वंश की सभी पर्यायवाची जातियों के नाम मंझवार के कॉलम में दर्ज किए जाएं और कोष्ठक में विमुक्त जनजाति भी अंकित की जाए, ताकि समाज की वास्तविक संख्या का सही आकलन हो सके। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में निषाद वंश की सभी पर्यायवाची जातियों को अन्य राज्यों की तरह अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने की मांग की। साथ ही शिक्षा, नौकरी और राजनीति में आरक्षण के साथ पेंशन की सुविधा दिए जाने की मांग भी उठाई। इसके अलावा 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में शहीद हुए निषाद वंश के लोगों के गांवों को आदर्श शहीद गांव घोषित करने और उनके परिवारों को स्वतंत्रता सेनानी सम्मान दिए जाने की मांग की गई।