दो महीने से सुर्खियों में रहे एसडीएम रिंकू सिंह राही का हुआ तबादला,, ये बने जालौन के नए एसडीएम

रिपोर्ट बबलू सेंगर

Jalaun news today । जालौन तहसील में लगभग दो माह तक एसडीएम के पद पर रहे आईएएस रिंकू सिंह राही नगर में अपने कार्यकाल के दौरान लगातार सुर्खियों में बने रहे। उनकी कार्यशैली की कई बार तारीफ हुई तो कई बार उन्हें व्यवहार को लेकर उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।
बीती छह मई को आईएएस रिंकू सिंह राही की नियुक्ति ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/एसडीएम के पद पर हुई थी। पदभार संभालने के बाद उन्होंने सबसे पहले नगर में अतिक्रमण की समस्या को लेकर कार्रवाई शुरू की। नगर में दुकानदारों के मनमर्जी के अनुसार चालान काटे गए। सराफा व्यापारी आशीष के यहां जब टीम पहुंची तो पांच हजार रुपये का चालान काटने की बात कही। जब उन्होंने इसे कम करने का अनुरोध किया तो दस हजार रुपये का चालान काटा गया। ध्यान रहे इससे पूर्व उन्हें अतिक्रमण को लेकर कोई नोटिस भी नहीं दिया गया। मनमर्जी से चालान काटने को लेकर व्यापारियों के विरोध के बाद सदर विधायक गौरीशंकर वर्मा भी नगर में व्यापारियों से मिले थे। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वह भी ऐसे अधिकारी को अपने क्षेत्र में नहीं चाहते हैं। पालिकाध्यक्ष प्रतिनिधि पुनीत मित्तल और सदर विधायक ने आगे से चालान न काटने का आश्वासन भी दिया था। इसके बाद लेखपाल भी एसडीएम की कार्यप्रणाली से खुश नहीं थे। लेखपालों ने अपनी समस्याओं को लेकर एसडीएम को दो बार ज्ञापन देने का प्रयास भी किया लेकिन आरोप है कि एसडीएम उनसे मिले तक नहीं बल्कि चेंबर भी बंद कर लिया। ग्राम पंचायत अतरछला के प्रधान अधिवक्ता विवेक सिंह सेंगर ने भी डीएम को ज्ञापन देकर बताया था कि समाधान दिवस के दौरान एक किसान के साथ वह तहसील पहुंचे थे जहां एसडीएम ने सार्वजनिक रूप से उन्हें दलाल कहते हुए भगा दिया था, उनकी समस्या को सुना तक नहीं गया था। कुछ दिन पूर्व लौना रोड पर अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान एक व्यापारी के पत्थर भी तोड़ने का आरोप लगा। 30 मई 2026 को स्थानांतरित किए गए पांच लेखपालों को उच्चाधिकारियों के आदेश के बावजूद कार्यमुक्त न किए जाने का आरोप लगास। 27 जून को आयोजित थाना दिवस के दौरान लेखपाल शिवम द्विवेदी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की धमकी दी। तहसील कार्यालय में शासन के निर्देशों के विपरीत निजी ऑपरेटरों से जनसुनवाई संबंधी कार्य कराए जाने का भी आरोप लगाया गया। इतना ही नहीं यह भी आरोप है कि एसडीएम की कार्यप्रणाली के चलते प्रभारी तहसीलदार सहित पांच लेखपाल चिकित्सा अवकाश पर चले गए। लेखपालों ने डीएम को सामूहिक अवकाश पर जाने संबंधी ज्ञापन डीएम को सौंपा था। इसके अलावा हाल ही में ब्लॉक प्रमुख रामराजा निरंजन के कोल्ड स्टोर पर जांच के दौरान एसडीएम पर ब्लॉक प्रमुख को थप्पड़ मारने का प्रयास एवं धक्का देने का आरोप लगा था। जिसकी सीसीटीवी फुटेज भी ब्लॉक प्रमुख द्वारा सार्वजनिक की गई। इसी के बाद एसडीएम के खिलाफ जिलाधिकाराी ने जांच के आदेश दिए थे और 30 जून को अंततः उन्हें एसडीएम जालौन के पद से स्थानांतरित एसडीएम न्यायायिक उरई के पद पर भेजा गया है। हालांकि इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में अनपढ़ बुजुर्गों को पढ़ाने के लिए उनके द्वारा मुहिक चलाई जा रही थी, उसकी ग्रामीण सराहना कर रहे थे। सभी गांवों और मोहल्लों के लिए व्हाट्सएप ग्रुप एसडीएम द्वारा बनाया गया था। जिसमें ग्रामीण अपनी समस्याओं को साझा कर रहे थे। इससे लोगों को तहसील मुख्यालय अपनी शिकायतें लेकर नहीं आना पड़ रहा था। एसडीएम स्वयं ग्रुप की निगरानी कर रहे थे। तहसील में लोगों को कार्य कराने के लिए चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे थे और बिना किसी देरी के उनके कार्य हो रहे थे।

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