(Bne)
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानमंडल के दोनों सदनों में गुरुवार को एक इतिहास रचा गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर दोनों सदनों में पूरा एक दिन महिला सदस्यों को समर्पित किया गया था, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष की महिला सदस्यों ने भागीदारी की और महिला हितों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। मानसून सत्र के चौथे दिन विधानसभा और विधान परिषद में केवल महिलाओं से जुड़े मुद्दों की गूंज रही। देश की किसी विधानसभा में यह पहला मौका था, जबकि महिला सदस्यों के लिए पूरा दिन समर्पित किया गया। आमतौर पर सरकार की पहल का विरोध करने वाला विपक्ष भी मुख्यमंत्री की इस सोच को लेकर सकारात्मक रहा। ऐतिहासिक कार्यवाही में चर्चा की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने वैदिक उद्धरणों और आख्यानों का उल्लेख करते हुए भारतीय संस्कृति में महिलाओं की महत्ता को रेखांकित किया। महर्षि वेदव्यास रचित श्लोक “नास्ति मातृसमा छाया नास्ति मातृ समा गतिः। नास्ति मातृसमं त्राणं नास्ति मातृसमा प्रिया॥” का संदर्भ लेते हुए कहा कि मां के समान कोई छाया नहीं, कोई सहारा नहीं, कोई रक्षक नहीं, मां के समान कोई प्रिय भी नहीं है। मातृशक्ति का यह भाव अगर हर नागरिक के मन में आ जाए तो कुछ भी असंभव नहीं। सीएम ने वैदिक कालीन विदुषी महिलाओं ब्रह्मवादिनी घोषा, लोपामुद्रा, अपाला से लेकर माता अनुसुइया, सती सावित्री, मैत्रेयी, रुक्मिणी आदि का स्मरण किया और बताया कि प्राचीन काल से लेकर आज के दौर तक हर काल में समाज निर्माण में माताओं-बहनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रसन्नता का विषय है कि आज सदन में आज सभी लोग नारी शक्ति को देख रहे हैं। आज सदन का दिन महिलाओं के नाम है। सीएम ने कहा कि भारत में महिला-पुरुष दोनों को समान अधिकार है। हम सभी को पता है कि मातृ शक्ति से सब कुछ संभव है।




