यूपी के जालौन जनपद के उरई पालिका ठेकेदारों ने डीएम से लगायी भुगतान कराने की गुहार,,

डीएम बोली यदि राज्य वित्त की धनराशि का दूसरे मद में किया खर्च तो होगी कायर्वाही

(ब्यूरो रिपोर्ट )

उरई (जालौन)। एक वर्ष पूर्व उरई पालिका परिषद द्वारा राज्य वित्त आयोग से मिले बजट से अनेकों स्थानों पर करोड़ों रुपये के विकास कार्य कराये गये थे। लेकिन एक वर्ष बाद भी ठेकेदारों का भुगतान न किये जाने का मुद्दा उस दौरान गरमा गया जब ठेकेदार संघ के अध्यक्ष अरविंद द्विवेदी के नेतृत्व में दजर्न भर से अधिक ठेकेदारों ने जिलाधिकारी से भेंट कर ज्ञापन सौंपते हुये भुगतान कराये जाने की गुहार लगायी। इस पर जिलाधिकारी ने साफ शब्दों में कहा कि यदि उरई पालिका ने राज्य वित्त आयोग से मिली धनराशि का दूसरे मदों में खर्च किया गया है तो उसकी जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कायर्वाही अमल में लायी जायेगी।
हमारे स्थानीय प्रतिनिधि से मिली जानकारी के अनुसार नगर पालिका परिषद उरई के ठेकेदार संघ अध्यक्ष अरविंद द्विवेदी के नेतृत्व में ठेकेदार रामनरायाण, संजू गोस्वामी, संदीप अग्निहोत्री, कृष्ण कुमार सिंह, विजय सेठ, सुनील गुप्ता, शैलू, सत्तार मंसूरी, अशोक वर्मा, अशोक राजपूत, सतेंद्र श्रीवास्तव आदि ने बताया कि वह सभी पंजीकृत ठेकेदार है हम सभी समय-समय पर नगर पालिका उरई में विकास कार्य में अपना सहयोग देते रहे हैं। वर्ष 2021 तक जब ईओ संजीव कुमार थे तब तक हम सभी के भुगतान रुटीन पर होते रहते थे। लेकिन ईओ विमलापति द्वारा राज्य वित्त आयोग द्वारा कराये गये निमार्ण कार्यों का भुगतान नहीं किया जा रहा है। जिससे प्रतीत होता है कि ईओ के स्थानांतरण के बाद राज्य वित्त आयोग की निमार्ण धनराशि का नगर पालिका परिषद उरई द्वारा किसी दूसरे मद में व्यय किया गया है और हम ठेकेदारों का भुगतान रोक दिया गया। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि ईओ संजीव कुमार के स्थानांतरण के बाद राज्य वित्त आयोग की निमार्ण धनराशि को जिससे ठेकेदारों का भुगतान होता था उक्त धनराशि को दूसरी मद में व्यय किया गया जिससे संबंधित अधिकारियों का निजी स्वार्थ की मंशा रही होगी और हम ठेकेदारों को बली का बकरा बनाकर आथिर्क संकट में डाल दिया गया। ठेकेदारों का कहना था कि यद भी एक जांच का विषय है कि राज्य वित्त की निमार्ण की धनराशि आखिर कहां विलुप्त हो गयी। उक्त गंभीर तथ्यों को देखते हुये ठेकेदार संघ आपसे अनुरोध करता है कि हम ठेकेदारों की समस्या का निराकरण जल्द कराया जाये। इस पर जिलाधिकारी ने ठेकेदारों को आश्वासन दिया कि पूरे प्रकरण की जांच करायेंगी और यदि जांच में राज्य वित्त आयोग की धनराशि का दूसरे मद में खर्च की गयी है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विधिक कायर्वाही अमल में लायी जायेगी।

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