वहीद के साथ उनके परिवार के और भी सदस्य ‘डील’ निमार्ण में मदद करते
(ब्यूरो रिपोर्ट)

Jalaun / konch news today । जालौन जनपद के कोंच में दशहरा मेला पर दौड़ दौड़ कर रोमांचक युद्ध करने वाले रावण और मेघनाद के पुतलों के निर्माण का काम युद्ध स्तर पर जारी है। इन्हें बनाने वाले कारीगर वहीद और उनके परिवार के तमाम सदस्य इन पुतलों को जल्द से जल्द तैयार कर लेने के लिहाज से दिन रात जुटे हैं।
कोंच की ऐतिहासिक विश्व विख्यात रामलीला अपनी जिन मैदानी लीला को लेकर देश की सर्वश्रेष्ठ मैदानी रामलीला बनी है वह हैं सीता हरण-मारीच वध और दशहरा मेला। दोनों मैदानी लीलाओं या यों कहें कि मेलों में मारीच और जटायु के साथ साथ रावण और मेघनाद के पुतलों को बनाने का काम एक महीने पहले से ही शुरू हो जाता है। आश्विन शुक्ल षष्ठी को गढ़ी के मैदान में जो मेला शुक्रवार को संपन्न हुआ उसमें मारीच यानी स्वर्ण मृग तथा जटायु के पुतलों का निमार्ण कस्बे के कारीगर वहीद मकरानी और उनके साथियों ने किया था। अब दशहरा मेले के लिए रावण और मेघनाद के विशालकाय पुतलों को भी वह तैयार करने में जुटे हैं। इस काम में उनकी मदद मुकीम अहमद, जाफिर, सईद, अनस, नसीम, रिहान आदि कर रहे हैं। मेले को दो दिन शेष रह जाने को देखते हुए उन्होंने काम करने की स्पीड बढ़ा दी है और दिन रात एक किए हैं। दौड़ाने के लिए इन पुतलों को गाड़ी पर बांधने के बाद इनकी ऊंचाई लगभग चालीस फीट हो जाती है।
वहीद मकरानी पचास साल से बना रहे डील, एक महीना लगता बनने में

कोंच। डीलों का निमार्ण करने वाले कारीगर वहीद मकरानी बताते हैं कि पिछले पचास सालों से वह डील बनाने का काम करते आ रहे हैं। उन्हें सभी चारों डील मारीच, जटायु, रावण और मेघनाद बनाने में पूरा एक महीना लग जाता है। इस काम में उनके बेटे के अलावा परिवार के अन्य लोग भी हाथ बंटाते हैं। वहीद बताते हैं कि यह उनका पैतृक धंधा है, रामलीला के डीलों के अलावा वह ताजियों का भी निमार्ण करते हैं। इसी से साल भर उनकी आजीविका चलती है।






