हर रोज बढ़ रही कटखने बंदरों के हमले की घटनायें
(ब्यूरो रिपोर्ट)

Jalaun / Kalpi news today जालौन जनपद के कालपी में बंदरों के हमले से बचने के दौरान छत से गिरकर घायल हुई महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना से नगर की जनता भयभीत है और छतों पर जाने के दौरान सतर्कताबरत रहे हैं।
बताया जाता है कि जनपद हमीरपुर के ग्राम शीतलपुर निवासी बलराम पाल लगभग 15 वर्षों से नगर के मुहल्ला आलमपुर इलाहाबाद बैंक के सामने गली में मकान बनाकर सपरिवार रह रहे हैं और कपड़ों की फेरी लगाकर आजीविका चलाते है। बताया जा रहा है कि शुक्रवार दोपहर उनकी 45 वर्षीय पत्नी सियादुलारी घर की छत पर धूप में गेहूं सुखा रही थी इसी दौरान बंदरों का झुण्ड आ गया था। वहां से भगाने के लिए उसने शोर मचाया तो वह हमलावर हो गए थे लेकिन परिजन जब तक मदद को आये इससे पहले महिला ने हमलावर हुए बंदरों से बचने के लिए सडक पर छलांग लगा दी थी जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गई थी। आनन फानन परिजनों ने उसे सीएचसी में दाखिल कराया था लेकिन हालत गंभीर होने पर डाक्टरों ने उसे कानपुर के लिए रिफर कर दिया था और देर रात उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई है। पड़ोसियों के मुताबिक महिला के दो पुत्रो में से एक की शादी हो चुकी है हालांकि 17 वर्षी एक पुत्री भी जिसकी उसे शादी करनी थी लेकिन बंदरो की वजह से वह अब यह इच्छा पूरी नहीं कर सकी है।
बंदर इससे पहले भी बने है मौत की वजह
कालपी। नगरवासियों की मानें तो वर्ष 2013 में 26 जुलाई को नगर के मुहल्ला आलमपुर खोयामण्डी के पास बंदरों ने एक भवन की चहारदीवारी में धक्का दे दिया था जिससे मायके आई सगी बहिने पानकुंवर और ममता की पत्थर गिरने से मौके पर ही मौत हो गई थी तो वर्ष 2023 में रावगँज मुहल्ला स्थित एक मकान में निर्माण करते राजमिस्त्री को बन्दरो ने खदेड लिया था जिससे उसकी सीढ़ियों से गिरकर मौत हो गई थी और अब बंदर ही महिला सियादुलारी की मौत की वजह बन गए हैं।
CHC चिकित्सक ने कहा
कालपी। वैसे तो नगर में बंदरों की मौजूदगी काफी पहले से है पर विगत एक दशक से इनकी आबादी में वेतहाशा बृद्धि हुई है और जगह और खाना कम होने से खूंखार भी हो गए हैं आलम यह है कि आमतौर पर लोगों से डरने वाले बंदर अब लोगों का सामान ही नहीं छीनते है बल्कि काट भी रहे हैं। सीएचसी के चिकित्सक डा. विशाल सचान के अनुसार बंदर काटने के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। 1 जनवरी से 9 फरवरी तक वह 300 लोगो को इंजेक्शन लगाये गए हैं।
जनता कई बार कर चुकी है बन्दरो को पकडने की मांग
कालपी। ऐसा भी नहीं है कि बन्दरों का उत्पात कोई नया हो बल्कि वर्षों से जनता इनसे परेशान है वह कब और किसका क्या नुकसान कर दे कोई भरोसा नहीं है। इसी वजह से नगर के कई मुहल्लों में सभी घरों में जाल लगाये गए है लेकिन फिर भी वह नुकसान कर ही देते हैं। अब इनका क्षेत्र विस्तार भी हो गया है। आमतौर पर कुछ विशेष क्षेत्रों में रहने वाली यह प्रजाति नगर के हर कोने में मिलेगी। इतना ही नहीं नगर से निकलकर यह जोल्हूपुर, छौंक और उसरगांव तक पहुंच चुके हैं हालाकि कई बार परेशान जनता इनसे निजात पाने के लिए पालिका प्रशासन और वन विभाग से आग्रह कर चुकी है लेकिन दोनों विभागों ने एक दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर जनता की मांग को ठंडे बस्ते बस्ते डाल दिया है।






