रिपोर्ट बबलू सेंगर

Jalaun news today । रविवार को चैत्र नवरात्र के चौथे दिन नगर के माता के मंदिरों में मां के चौथे स्वरूप कूष्मांडा की पूजा अर्चना की गयी। भक्तों ने माता के मंदिरों में पहुंचकर श्रृद्धा पूर्वक विधि विधान से पूजा अर्चना की और मां से यश, सुख, समृद्धि, अच्छी सेहत और दीर्घायु की कामना की।
चैत्र नवरात्र के चौथे दिन नगर के प्राचीन व प्रमुख छोटी माता, बड़ी माता, छटी माता, संतोषी माता, अलखिया माता, कामांक्षी देवी पहाड़पुरा में पूजा अर्चना की गई। सूर्योदय से पूर्व मां की मंगला आरती से मंदिरों के पट खुल गए और भक्तों का पहुंचना शुरू हो गया। मंदिरों से आती शंख, झालर, घंटा व देवी गीतों की ध्वनि से नगर का वातावरण मां की भक्तिमय हो गया। पंडित अरविंद बाजपेई ने बताया कि मां कूष्मांडा की आठ भुजाएं हैं, इसलिए इनको अष्टभुजा देवी भी कहते हैं। वह अपनी आठ भुजाओं में चक्र, गदा, धनुष, बाण, अमृत कलश, कमल और कमंडल धारण करती हैं। मां कूष्मांडा का वाहन सिंह है, जो साहस और निर्भय का प्रतीक है। देवी अपने एक हाथ में जप की माला भी धारण करती हैं। मां कूष्मांडा को कुम्हड़ा अति प्रिय है, इसलिए भी इनको कूष्मांडा कहते हैं.।






