बारिश और ओलावृष्टि से हुए नुकसान में छोटे किसानों को भी मुआवजा दिलाने की मांग

रिपोर्ट बबलू सेंगर

Jalaun news today । जालौन क्षेत्र में हाल ही में हुई ओलावृष्टि और भारी बारिश से किसानों को हुए नुकसान को लेकर मुआवजे की मांग तेज हो गई है। इस संबंध में अनुसूचित जाति जनजाति उत्पीड़न निवारण एवं सशक्तिकरण केंद के जिला प्रभारी ने दैवीय आपदा प्रबंधन समिति के चेयनमैन को शिकायती पत्र भेजकर छोटे और बलकट पर खेती करने वाले किसानों को भी उचित मुआवजा दिलाने की मांग उठाई है।
अनुसूचित जाति जनजाति उत्पीड़न निवारण एवं सशक्तिकरण केंद के जिला प्रभारी अरविंद कुमार पहारिया ने दैवीय आपदा प्रबंधन समिति के चेयनमैन लालजी प्रसाद निर्मल को शिकायती पत्र भेजकर बताया कि बीते कुछ दिनों में अचानक मौसम परिवर्तन के चलते तेज बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की खड़ी फसलों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। खेतों में तैयार फसलें नष्ट हो जाने से किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। वर्तमान में सरकारी मुआवजा केवल उन्हीं किसानों को मिल पाता है, जिनके नाम पर जमीन दर्ज होती है, जबकि बड़ी संख्या में ऐसे किसान भी हैं जो बलकट पर जमीन लेकर खेती करते हैं। ये किसान भी बराबर मेहनत करते हैं, लेकिन मुआवजा प्रक्रिया में उन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है, जिससे वे पूरी तरह से आर्थिक संकट में फंस जाते हैं। कई छोटे किसान केवल एक या दो बीघा जमीन पर खेती कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। फसल नष्ट होने के बाद उनके सामने रोजमर्रा के खर्च और राशन की समस्या भी खड़ी हो गई है। ऐसे हालात में उनके पास कोई वैकल्पिक साधन नहीं बचा है, जिससे वे अपने परिवार का पालन कर सकें। माह में सरकार द्वारा प्रति यूनिट पांच किग्रा राशन भी भरण पोषण के लिए पर्याप्त नहीं होता है। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि महीने में मिलने वाले राशन की मात्रा बढ़ाई जाए साथ ही दैवीय आपदा में किसानों को हुए नुकसान की निष्पक्ष जांच कराई जाए और सभी प्रभावित किसानों को उनकी वास्तविक क्षति के अनुसार मुआवजा दिया जाए। साथ ही बटाई पर खेती करने वाले किसानों को भी मुआवजा योजना में शामिल किया जाए, ताकि उन्हें भी राहत मिल सके।